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पानी के लिए तड़पता इंदौर: नर्मदा के तीन चरण भी नहीं बुझा पा रहे शहर की प्यास, टैंकर के दम पर जी रही आधी आबादी

सार

Indore Water Crisis: जिस नर्मदा परियोजना को इंदौर की जीवनरेखा माना गया था, उसके तीनों चरण अब शहर की प्यास के आगे छोटे पड़ने लगे हैं। सवाल सिर्फ पानी का नहीं, बल्कि इंदौर के भविष्य का है। आने वाले वर्षों में क्या होगा और क्यों बनी यह स्थिति, इस पर एक खास खबर- 
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इंदौर में वर्तमान में पानी को लेकर हाहाकार जैसी स्थिति बन रही है। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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35 लाख की आबादी वाला इंदौर पानी के मामले में 70 किलोमीटर दूर बहने वाली नर्मदा नदी के भरोसे है। इस साल शहर में हुए जलसंकट ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। अब नर्मदा के तीनों चरण भी शहर की प्यास नहीं बुझा पा रहे हैं। तीसरा चरण वर्ष 2024 तक की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया था, लेकिन उसकी क्षमता दो साल पहले ही कम पड़ने लगी। अब कई इलाके टैंकरों के भरोसे हैं। रोज किसी न किसी क्षेत्र में जलसंकट को लेकर चक्काजाम और प्रदर्शन हो रहे हैं। यह स्थिति करीब पांच साल बाद फिर निर्मित हुई है।

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नगर निगम ने चौथे चरण के निर्माण की तैयारी शुरू कर दी है, लेकिन इसे पूरा होने में लगभग तीन साल लगेंगे। ऐसे में आने वाले वर्षों में शहरवासियों को जलसंकट का सामना करना पड़ सकता है।

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जलूद में नर्मदा का तीसरा चरण - फोटो : अमर उजाला

48 वर्षों में नर्मदा के तीन चरण

70 के दशक में इंदौर में सूखे जैसे हालात बन गए थे। तब शहर में नर्मदा का पानी लाने के लिए बड़ा आंदोलन हुआ। करीब एक माह तक चले आंदोलन के बाद तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने नर्मदा परियोजना को मंजूरी दी।

  • पहला चरण वर्ष 1978 में शुरू हुआ, जिसमें 90 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) पानी इंदौर लाया गया।
  • दूसरा चरण वर्ष 1990 में शुरू हुआ और इसमें भी 90 एमएलडी पानी जोड़ा गया।
  • बढ़ती आबादी को देखते हुए तीसरे चरण की जरूरत महसूस हुई। वर्ष 2014 में शुरू हुए तीसरे चरण के तहत 360 एमएलडी पानी शहर को मिलने लगा।
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पानी के लिए इंदौर में संघर्ष। - फोटो : अमर उजाला

प्रति व्यक्ति 100 लीटर पानी भी नहीं

तीनों चरणों के बाद अधिकारियों का अनुमान था कि शहर में प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 180 लीटर पानी की आपूर्ति हो सकेगी, लेकिन तेजी से बढ़ती आबादी के कारण अब कई क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति 100 लीटर पानी भी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। दरअसल, तीसरा चरण लगभग 25 लाख आबादी की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था, लेकिन बाद में 29 गांव नगर निगम सीमा में शामिल कर लिए गए। वहां भी नर्मदा लाइन बिछाने की जिम्मेदारी निगम पर आ गई। अब शहर की आबादी 35 लाख से अधिक हो चुकी है। इसी को देखते हुए नगर निगम अब चौथे चरण की योजना लगभग 75 लाख आबादी की जरूरतों के अनुसार बना रहा है। इस परियोजना पर लगभग 2200 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। अधिकारियों का दावा है कि चौथा चरण पूरा होने के बाद अगले 20 वर्षों तक पानी की बड़ी समस्या नहीं होगी।

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रात में टंकी पर पानी भरने वालों की कतार - फोटो : अमर उजाला

इसलिए इंदौर में पानी की कमी

  • शहर के आसपास के तालाबों की उपेक्षा की गई। नर्मदा परियोजनाओं के बाद तालाबों की क्षमता बढ़ाने पर ध्यान नहीं दिया गया। इसके बजाय उनके कैचमेंट एरिया में अतिक्रमण बढ़ गए। परिणामस्वरूप अब बारिश में भी तालाब पूरी तरह नहीं भर पाते और गर्मियों में सूख जाते हैं। इससे भूजल स्तर लगातार गिर रहा है और बोरिंग सूखने लगे हैं।
  • यशवंत सागर की संग्रहण क्षमता बढ़ाई गई, लेकिन उससे जलापूर्ति क्षमता नहीं बढ़ सकी। वर्तमान में यहां से लगभग 35 एमएलडी पानी लिया जा रहा है। यदि इसकी आपूर्ति क्षमता बढ़ाई जाए और इसे नर्मदा-गंभीर लिंक परियोजना से जोड़ा जाए, तो शहर के पश्चिमी हिस्से में पानी की समस्या काफी हद तक समाप्त हो सकती है।
  • शहर में वॉटर रिचार्जिंग को लेकर पर्याप्त जागरूकता नहीं है। नगर निगम ने भी बड़े स्तर पर रिचार्जिंग स्पॉट विकसित नहीं किए हैं। कई उद्यानों में हरियाली बनाए रखने के लिए अब भी नर्मदा का पानी उपयोग किया जा रहा है।
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मेयर पुष्यमित्र भार्गव - फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर

चौथा चरण शुरू करने की तैयारी

 नर्मदा के चौथे चरण का भूमिपूजन हो चुका है और जल्द निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। इसकी समयसीमा लगभग दो वर्ष रखी गई है। फिलहाल जलसंकट से निपटने के लिए नगर निगम ने टैंकरों की संख्या बढ़ा दी है।  -पुष्य मित्र भार्गव,मेयर

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