जलूद में नर्मदा का तीसरा चरण
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48 वर्षों में नर्मदा के तीन चरण
70 के दशक में इंदौर में सूखे जैसे हालात बन गए थे। तब शहर में नर्मदा का पानी लाने के लिए बड़ा आंदोलन हुआ। करीब एक माह तक चले आंदोलन के बाद तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने नर्मदा परियोजना को मंजूरी दी।
- पहला चरण वर्ष 1978 में शुरू हुआ, जिसमें 90 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) पानी इंदौर लाया गया।
- दूसरा चरण वर्ष 1990 में शुरू हुआ और इसमें भी 90 एमएलडी पानी जोड़ा गया।
- बढ़ती आबादी को देखते हुए तीसरे चरण की जरूरत महसूस हुई। वर्ष 2014 में शुरू हुए तीसरे चरण के तहत 360 एमएलडी पानी शहर को मिलने लगा।
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पानी के लिए इंदौर में संघर्ष।
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प्रति व्यक्ति 100 लीटर पानी भी नहीं
तीनों चरणों के बाद अधिकारियों का अनुमान था कि शहर में प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 180 लीटर पानी की आपूर्ति हो सकेगी, लेकिन तेजी से बढ़ती आबादी के कारण अब कई क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति 100 लीटर पानी भी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। दरअसल, तीसरा चरण लगभग 25 लाख आबादी की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था, लेकिन बाद में 29 गांव नगर निगम सीमा में शामिल कर लिए गए। वहां भी नर्मदा लाइन बिछाने की जिम्मेदारी निगम पर आ गई। अब शहर की आबादी 35 लाख से अधिक हो चुकी है। इसी को देखते हुए नगर निगम अब चौथे चरण की योजना लगभग 75 लाख आबादी की जरूरतों के अनुसार बना रहा है। इस परियोजना पर लगभग 2200 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। अधिकारियों का दावा है कि चौथा चरण पूरा होने के बाद अगले 20 वर्षों तक पानी की बड़ी समस्या नहीं होगी।
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रात में टंकी पर पानी भरने वालों की कतार
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मेयर पुष्यमित्र भार्गव
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चौथा चरण शुरू करने की तैयारी
नर्मदा के चौथे चरण का भूमिपूजन हो चुका है और जल्द निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। इसकी समयसीमा लगभग दो वर्ष रखी गई है। फिलहाल जलसंकट से निपटने के लिए नगर निगम ने टैंकरों की संख्या बढ़ा दी है। -पुष्य मित्र भार्गव,मेयर