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Indore: देवी अहिल्या की बेटी की ढाई सौ साल पुरानी छत्री संवारेगा उनका परिवार, सती हो गई थीं मुक्ताबाई

Wed, 05 Feb 2025 11:46 AM IST
अभिषेक चेंडके न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

भारतीय शैली में नक्काशीदार पत्थरों से निर्मित छत्री को देखने हाल ही में फणसे परिवार के सदस्य गए थे। उन्होंने तय किया कि छत्री का पुरातत्व महत्व है। पर्यटक भी इसे देखने आते है, इसलिए छत्री को संवारा जाएगा। 
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महेश्वर की इस छत्री को संवारा जाएगा। - फोटो : अमर उजाला
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खरगोन जिले के महेश्वर में स्थित श्री देवी अहिल्याबाई होलकर की पुत्री मुक्ताबाई और दामाद यशवंतराव फणसे की छत्री का जीर्णोद्धार उनके इंदौर निवासी वंशजों द्वारा किया जाएगा। यह छत्री 1791 में महारानी देवी अहिल्या ने अपनी बेटी और दामाद की स्मृति में महेश्वर घाट पर बनवाई थी। मुक्ताबाई के पति यशवंत राव फणसे की बीमारी से मौत होने के बाद बेटी भी उनके साथ सती हो गई थी, जबकि अहिल्या बाई नहीं चाहती थी कि वह सती हो।

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भारतीय शैली में नक्काशीदार पत्थरों से निर्मित इस छत्री को देखने के लिए हाल ही में फणसे परिवार के सदस्य गए थे। उन्होंने तय किया कि छत्री का पुरातत्व महत्व है और पर्यटक भी इसे देखने आते हैं, इसलिए छत्री को संवारा जाएगा। वंशज नरेंद्र फणसे ने कहा कि छत्री के गुंबद का हिस्सा खराब हो चुका है। उसकी मरम्मत के अलावा पत्थरों को साफ किया जाएगा। इसके लिए महाराष्ट्र के आर्किटेक्टों से चर्चा की गई है। हमारी कोशिश है कि छत्री के जीर्णोद्धार से हम पूर्वजों को श्रद्धांजलि देंगे, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए महेश्वर की सांस्कृतिक और स्थापत्य विरासत को संरक्षित और समृद्ध करने का काम भी करेंगे।

पिंड़ारियों को काबू में किया था यशवंतराव फणसे ने
मुक्ताबाई के पति यशवंतराव फणसे होलकर राजवंश की सेना में महत्वपूर्ण पद पर थे। देवी अहिल्या की रियासत में लूटपाट करने वाले पिंडारियों का बड़ा आतंक था। देवी अहिल्या ने उनका जिम्मा यशवंत राव को दिया था। जिन इलाकों में लूट होती थी, वहां यशवंतराव ने अपनी टुकड़ियां रखना शुरू कर दी और जेल भी बनवाई। वहां पर पिंड़ारियों को कैद कर रखा जाने लगा। इसके बाद लूट की घटनाएं कम होने लगी थीं। इससे खुश होकर देवी अहिल्या ने अपनी बेटी का रिश्ता यशवंत राव से किया था।
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बेटी को सती होने से नहीं रोक पाईं देवी अहिल्या 
1791 में यशवंतराव फणसे की मौत हो गई। तब तमाम कोशिशों के बावजूद देवी अहिल्या बाई अपनी बेटी मुक्ताबाई को सती होने से रोक नहीं पाई थीं। इसके बाद बेटी की याद में देवी अहिल्या ने महेश्वर में नों की छत्री बनवाई और नर्मदा नदी के किनारे फणसे घाट भी बनवाया था।

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