चौपाटी पर नंबरों के आधार पर ही लगी दुकानें।
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देशभर में अपने अनूठे स्वाद और व्यंजनों के लिए प्रसिद्ध इंदौर की सराफा चौपाटी को नगर निगम ने व्यवस्थित करने के लिए उसका आकोर छोटा किया है। चौपाटी पर पहले 150 से ज्यादा खान-पान की दुकानें लगती थीं, लेकिन अब उनकी संख्या सीमित कर दी है। अब चौपाटी पर 69 दुकानें ही लग सकेंगी। नगर निगम ने दुकानों की संख्या और कम कर उन्हें तख्तियां दी हैं। अब उन तख्तियों को दिखाने के बाद ही चौपाटी में इन दुकानदारों को प्रवेश मिलेगा।
भेदभाव कर हटाया गया
जिन दुकानों को सराफा चौपाटी से हटाया गया है। वे विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि भेदभाव कर चौपाटी से दुकानों को हटाया गया है। वे अपने दस्तावेज लेकर आए और अफसरों से कहा कि वे वर्षों से चौपाटी में दुकानें लगा रहे हैं। हटाने का क्या आधार रखा गया। यह समझ से परे है, क्योंकि पहले कहा गया था कि परंपरागत व्यंजनों को ही चौपाटी में स्थान दिया जाएगा, लेकिन अभी भी मोमोस, नूडल्स के स्टाॅल लगे हुए हैं।
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हमें तो चौपाटी में चहल-पहल की आदत
उधर, क्षेत्र के रहवासी देवव्रत पालीवाल कहते हैं कि हमारा घर भी सराफा में है और चौपाटी में दुकान भी लगाते हैं। हमें सराफा चौपाटी में चहल पहल की आदत है। अभी चौपाटी का समय बदला है। सोने चांदी की दुकानें बंद होने के बाद चौपाटी लग रही है। इस कारण थोड़ी देर के लिए सराफा सुना लगता है। पहले चौपाटी रोज साढ़े आठ बजे लगती थी। अब समय बदला है। दुकानें भी कम हुई है। इससे चौपाटी व्यवस्थित होगी। चौपाटी और सोना चांदी सराफा एसोसिएशनों को सोचना चाहिए कि किसी का नुकसान न हो और स्वाद की परंपरा भी कायम रहे।
परंपरागत व्यंजन गजक का स्टाॅल भी हटाया
नटवर लाल नेमा ने बताया कि प्रशासन व्यवस्था सुधार सकता है, लेकिन किसी को रोजगार से हटाना गलत है। जो नए दुकानदार आए हैं। उनकी भी व्यवस्था करना चाहिए। सराफा चौपाटी में 150 से ज्यादा दुकानें है। अभी 69 दुकानें लगने दी जा रही हैं। मेरी भी एक दुकान कम हो गई है। हम तो परंपरागत गजक बेचते हैं, लेकिन उसकी दुकान भी कम कर दी।
सराफा कारोबारी रत्नेश करते हैं कि चौपाटी में परंपरागत व्यंजनों की दुकानें ही लगना चाहिए। चौपाटी में गैस की टंकियों का इस्तेमाल होता है। ज्यादा दुकानें होने के कारण लोगों को खड़े रहने की जगह नहीं मिलती थी।