सुबह तक सड़कों पर रही झांकियां।
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इंदौर की सड़कों पर सुबह तक झांकियों का कारवां नजर आया। निर्णायक मंच के सामने से राजकुमार मिल की झांकी सुबह 7.10 बजे निकली। रात को जागे लोग तो सुबह घरों की तरफ लौटना शुरू हो गए थे, लेकिन सुबह झांकियां देखने उठे लोग सड़कों पर नजर आए।
सुबह छह बजे पुलिस जवानों ने अखाड़ों को कृष्णपुरा छत्री की तरफ रोककर लौटने के लिए कहा, लेकिन उस्ताद-खलिफा अड़े रहे। सुबह के उजाले में स्वदेशी मिल और राजकुमार मिल की झांकी को लोगों ने निहारा। इस कारण निर्णायक मंच को भी निर्णय लेने में देरी हुई।
नए अफसर नहीं बढ़वा पाए अखाड़े
बीते तीन-चार वर्षों से झांकियां सुबह छह बजे तक मिलों की तरफ लौटने लगती थी। इसकी वजह यह रहती थी कि अनुभवी अफसर अखाड़ों को चल समारोह में जल्दी बढ़ाने के दबाव बनाते थे, लेकिन इस बार अफसर इसमें चूक कर गए। जो अखाड़े अपनी झांकियों के क्रम से पिछड़ गए थे, वे दूसरी झांकियों के साथ शामिल हो गए। इस कारण स्वदेशी हयर राजकुमार मिल की झांकी सुबह तक सड़क पर रही। कई स्वागत मंच तब तक खुलना शुरू हो गए थे। निर्णायक कमेटी भी सुबह आठ बजे घरों की तरफ लौटी।