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इंदौर: 50 लाख संपत्तियों की रजिस्ट्री पर ब्रेक, पटवारी बोले- जनता की रजिस्ट्री में अपना आधार कार्ड नहीं देंगे

Mon, 21 Sep 2026 03:08 PM IST
Arjun Richhariya न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

इंदौर से शुरू की गई प्रदेश की स्वामित्व योजना के तहत पटवारियों के विरोध के कारण 5 दिनों में एक भी निशुल्क रजिस्ट्री नहीं हो सकी है। आधार कार्ड सत्यापन और भविष्य की जिम्मेदारी से चिंतित पटवारियों की मंत्री संग बैठक बेनतीजा रही, जिससे अभियान रुक गया।
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भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने इस योजना को लांच किया था। - फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
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विस्तार
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भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के द्वारा लांच की गई स्वामित्व योजना ठप हो गई है। मध्य प्रदेश में 17 सितंबर को इंदौर से शुरू किए गए राज्य स्तरीय निशुल्क संपत्ति पंजीयन अभियान को लेकर एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। योजना के क्रियान्वयन के 5 दिन बीत जाने के बाद भी पूरे प्रदेश में प्रस्तावित लगभग 50 लाख संपत्तियों में से एक भी रजिस्ट्री दर्ज नहीं की जा सकी है। इस योजना के ठप होने का मुख्य कारण क्षेत्रीय पटवारियों द्वारा किया जा रहा विरोध है। गौरतलब है कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और मुख्यमंत्री मोहन यादव की मौजूदगी में पिछले सप्ताह इस योजना को भव्य तरीके से लांच किया गया था। 
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पटवारी बोले अपना आधार कार्ड नहीं देंगे
तय नियमों के अनुसार रजिस्ट्री निष्पादन की प्रक्रिया क्षेत्रीय पटवारी को पूरी करनी है, जबकि एसडीएम द्वारा रजिस्ट्री संपादित की जानी है। इसमें पटवारी को आधार कार्ड सत्यापन करना है और पटवारियों का कहना है कि हम अपना निजी डाटा इस काम में नहीं देंगे। बाद में जमीन का यदि कोई कानूनी विवाद होता है तो वह भी इस मामले में स्वतः एक पक्ष बन जाएंगे और कानूनी झमेलों में फंसेंगे। इंदौर में पटवारियों के इस रुख के कारण अभियान की शुरुआत से ही काम पूरी तरह अटका हुआ है।

पटवारी संघ का विरोध बना रुकावट
स्वामित्व योजना की शुरुआत के बाद से ही प्रदेशभर के पटवारी संघ ने इस प्रक्रिया पर अपनी कड़ी आपत्तियां जताई हैं। पटवारियों का मुख्य तर्क यह है कि यदि रजिस्ट्री निष्पादन में आगे चलकर कोई तकनीकी या विधिक त्रुटि पाई जाती है, तो उसके लिए उन्हें सीधे जिम्मेदार ठहराया जाएगा। इसके साथ ही, रजिस्ट्री की प्रक्रिया के दौरान पटवारियों के आधार और पैन कार्ड का सत्यापन किया जा रहा है, जिससे उन्हें भविष्य में कानूनी और वित्तीय उलझनों में फंसने की आशंका है। पटवारियों का मानना है कि इस व्यवस्था में सुधार के बिना काम करना उनके लिए जोखिम भरा साबित हो सकता है।
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राजस्व मंत्री के साथ वार्ता रही बेनतीजा
इस गतिरोध को समाप्त करने के लिए पटवारी संघ के राजस्व मंत्री करण वर्मा के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक भी आयोजित की गई थी। हालांकि, इस बातचीत में कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी और मामला जस का तस बना रहा। इसका सीधा असर योजना की प्रगति पर पड़ा है और पांच दिन बीत जाने के बाद भी एक भी संपत्ति का पंजीयन नहीं हो पाया है। यदि यह गतिरोध जल्द दूर होता है, तो अकेले इंदौर जिले में ही शुरुआती चरण में लगभग 93 हजार से अधिक पात्र हितग्राहियों को सीधा लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है।

ग्रामीणों को कानूनी हक और सुविधाओं का इंतजार
वर्षों से अपनी जमीन और मकानों में निवास करने के बावजूद बड़ी संख्या में ग्रामीण नागरिकों के पास मालिकाना हक के पक्के कानूनी दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। इन्हीं नागरिकों को अपनी संपत्ति का वैधानिक अधिकार देने के उद्देश्य से स्वामित्व योजना के तहत निःशुल्क रजिस्ट्री अभियान की शुरुआत की गई है। इस योजना के माध्यम से ग्रामीणों को मालिकाना हक मिलने के साथ ही बैंकों से आसानी से ऋण प्राप्त करने जैसी कई सुविधाएं मिलनी हैं। परंतु पटवारियों के विरोध के कारण फिलहाल यह पूरा अभियान अधर में लटका हुआ है।

पटवारियों की समस्याओं का समाधान निकालकर जल्द शुरू होगी प्रक्रिया
इस पूरे मामले पर वरिष्ठ जिला पंजीयक डॉ. अमरेश नायडू ने स्पष्ट किया है कि केंद्र सरकार की इस महत्वपूर्ण योजना पर राज्य स्तर पर तेजी से काम जारी है। 17 सितंबर से शुरू हुए इस अभियान में रजिस्ट्री पूरी तरह से निशुल्क रखी गई है। उन्होंने बताया कि अभी तक किसी भी रजिस्ट्री के पूर्ण होने की आधिकारिक सूचना नहीं मिली है, लेकिन पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया जारी है और जल्द ही पटवारियों की समस्याओं का समाधान निकालकर पंजीयन कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा।

पटवारी संघ बोला प्रदेश में एक भी रजिस्ट्री नहीं होने देंगे
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के द्वारा लांच की गई स्वामित्व योजना ठप हो गई है। पटवारी संघ के जिला अध्यक्ष मनोज परिहार ने बताया कि पूरे प्रदेश में हम इस योजना के विरोध में हैं। इसमें रजिस्ट्री नहीं होने देंगे। इंदौर में 93 हजार रजिस्ट्री होना हैं। हमें रजिस्ट्री करने के लिए निष्पादक बनाया जा रहा है। उसमें हमारा निजी डाटा जा रहा है। पहले रजिस्ट्री होती थी तो उसमें हमारा निजी डाटा नहीं जाता था। ड्राफ्ट में भी कई विसंगतिया हैं। मुख्य रूप से यह काम पंचायत का है। पंचायत इसी पर टैक्स वसूलेगी। उन्हें ही यह काम संभालना चाहिए। यदि हमें काम दे भी रहे हैं तो हमारा निजी डाटा जनता के बीच न जाए। यदि जमीन के किसी विवाद में सिविल का मामला बनेगा तो हम भी उसमें एक पक्ष बन जाएंगे। इससे हमें परेशानी होगी। केंद्र सरकार ने भी पहले इस योजाना में रजिस्ट्री का विकल्प नहीं दिया था। सिर्फ पट्टे बांटने का प्रावधान था। राज्य सरकार इसमें रजिस्ट्री कर रही है। यह अच्छी बात है लेकिन इसमें हमारा निजी डाटा जनता के बीच में नहीं जाना चाहिए। 
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