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Indore: पहले से तय थी शिवराज की डिनर डिप्लोमेसी, चार दिन पहले किया था विजयवर्गीय को फोन

Fri, 27 Jun 2025 08:50 PM IST
अभिषेक चेंडके न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

शिवराज जब विजयवर्गीय के घर पहुंचे तो उन्होंने इंदौरी पोहे खाने की इच्छा जताई। इसके बाद विजयवर्गीय के छोटे भाई विजय विजयवर्गीय ने अपने हाथ से पोहे बनाए। शिवराज और साधना करीब एक घंटे रुके। परिवार के साथ उन्होंने भोजन भी किया।
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शिवराज व विजयवर्गीय के बीच मुलाकात। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बीच बंद कमरे में हुई मुलाकात और निवास पर जाने की राजनीतिक हलकों में बड़ी चर्चा है। इसके अलग-अलग कयास लगाए जा रहे है, लेकिन चार दिन पहले से शिवराज ने फोन पर विजयवर्गीय को कह दिया था कि वे गुरुवार को इंदौर आएंगे और इस बार मिलना है। इसके चलते विजयवर्गीय भी गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रुपाणी को श्रद्धाजंलि देने गुरुवार के बजाए शुक्रवार को राजकोट गए।

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शिवराज जब सोयबीन अनुसंधान केंद्र गए तो बंद कमरे में उन्होंने 18 मिनट तक मंत्री विजयवर्गीय से चर्चा कर ली थी। इसके बाद शाम को शिवराज सिंह अपनी पत्नी साधना सिंह के साथ विजयवर्गीय के नंदानगर स्थित निवास पर भी गए। दरअसल साधना सिंह और मंत्री विजयवर्गीय की पत्नी आशा की अच्छी मित्रता है। उन दोनों को भी मिलना था। 9 साल पहले जब आशा विजयवर्गीय को दिल का दौरा पड़ा था तो साधना सिंह इंदौर आकर ने आईसीयू में उनकी चार घंटे तक देखभाल की थी। लंबे समय से दोनो नहीं मिले थे। 
 

इंदौरी पोहे खाने की इच्छा जताई

शिवराज जब विजयवर्गीय के घर पहुंचे तो उन्होंने इंदौरी पोहे खाने की इच्छा जताई। इसके बाद विजयवर्गीय के छोटे भाई विजय विजयवर्गीय ने अपने हाथ से पोहे बनाए। शिवराज और साधना करीब एक घंटे रुके। परिवार के साथ उन्होंने भोजन भी किया। शिवराज दोपहर में विधायक मालिनी गौड़ के निवास पर भी गए थे।

 

30 साल पुरानी दोस्ती है

शिवराज और विजयवर्गीय की दोस्ती 30 साल से भी ज्यादा पुरानी है। दोनो भाजपा नेत्री उमा भारती के समर्थक थे और युवा मोर्चा में सक्रिय थे। शिवराज जब विदिशा से चुनाव लड़ते थे तो विजयवर्गीय इंदौर से कार्यकर्ताअेां की टोली लेकर उनके लिए चुनाव का काम करने कई बार गए। शिवराज के मुख्यमंत्री बनने के बाद समीकरण बदले और दोनों के बीच दूरियां बढ़ने लग गई थी। मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद शिवराज ने जब केंद्र की राजनीति शुरू की तो फिर से विजयवर्गीय व शिवराज के बीच पहले जैसी मित्रता नजर आने लगी है।

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