इस साल केंद्रीय बजट में मध्य प्रदेश को रेल परियोजना में सबसे ज्यादा राशि इंदौर-बुधनी रेल परियोजना को मिली। एक हजार करोड़ रुपये की राशि इसके लिए स्वीकृत हुई।
चार साल पहले शुरू हुई यह परियोजना मार्च 2024 तक पूर्ण होना थी, लेकिन अभी तक 25 प्रतिशत काम भी ठीक से नहीं हो सका। बुधनी उपचुनाव के प्रचार में भी कांग्रेस ने यह मुद्दा उठाया।
अब देखना है कि 13 नवंबर बुधवार को होने वाले मतदान में इसका कितना असर नजर आता है। केंद्र सरकार ने दो साल पहले इंदौर-देवास, सिहोर में भूमि अधिगृहण का फायनल नोटिफिकेशन जारी किया था। भूमि अधिगृहण का सिहोर, बुधनी व अन्य क्षेत्रों में किसानों ने काफी विरोध किया।
विधानसभा चुनाव और फिर लोकसभा चुनाव के कारण भूमि अधिगृहण करने में देरी की। इसका असर इस प्रोेजेक्ट पर पड़ा। अभी कुछ हिस्सों में पुल-पुलियाएं और रेल लाइ बिछ पाई है, जबकि इस प्रोजक्ट में 100 से ज्यादा पुल-पुलियाएं, 33 ब्रिज बनना है। चापड़ा से कलावर के बीच पांच किलोमीटर की एक सुरंग भी बनना है। 200 किलोमीटर लंबी रेल लाइन को बिछाने की मंजूरी वर्ष 2018 में मिली थी। प्रोजेक्ट के लिए 500 हैक्टेयर से ज्यादा जमीन का अधिग्रहण होगा।
चापड़ा, कन्नौद, खातेगांव का व्यापार बढ़ेगा
इंदौर से बुधनी के बीच 200 किलोमीटर की लाइन बिछाई जाना है। इससे इंदौर से जबलपुर की दूरी कम हो जाएगी। साथ ही चापड़ा, कन्नौत, खातेगांव जैसे क्षेत्र भी रेल रुट के नक्शे पर आ जाएंगे और इन ग्रामीण क्षेत्रों का व्यापार बढ़ेगा। रेल मामलों के जानकार नागेश नामजोशी ने बताया कि यह परियोजना एक पिछड़े क्षेत्र को समृद्ध करेगी, लेकिन इसके निर्माण में गति लाने की जरुरत है।