उज्जैन के एक ठेकेदार का पैमेंट नहीं करने पर मंगलवार को इंदौर सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत ने कहा कि जब तक ठेकेदार को भुगतान नहीं हो जाता, अफसरों का वेतन आधा किया जाए।
कोर्ट ने चार सप्ताह में ठेकेदार को भुगतान करने को कहा है। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर सही में नगर निगम में फंड की कमी है तो शासन मामले में देखरेख करे और नगर निगम को अपने अधिगृहण में लें।
दरअसल ठेकेदार विमल जैन ने भुगतान नहीं होने पर हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। मंगलवार को सुनवाई में कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि महाकाल की नगरी उज्जैन में अधिकारी अकाल ढा रहे है। सरकार इसे देखे। यदि उज्जैन नगर निगम की आर्थिक स्थिति खराब है और वह भुगतान नहीं कर पा रहा है तो शासन नगर निगम को अपने अधीन ले।
याचिकाकर्ता के वकील लक्की जैन ने कोर्ट से कहा कि चार साल पहले उज्जैन के एक तालाब का सौदर्यीकरण किया गया था। इसका ठेका जैन ने लिया था। जैन ने इस प्रोजेक्ट पर 70 लाख रुपये खर्च किए, लेकिन नगर निगम ने पैसे की कमी का हवाला देकर काम बंद करा दिया।
ठेकेदार ने किए गए काम का भुगतान मांगा तो भुगतान भी नहीं किया जा रहा है। साढ़े तीन साल तक नगर निगम के चक्कर काटने के बाद ठेकेदार ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। अब कोर्ट चार माह में ठेकेदार के भुगतान के निर्देश नगर निगम को दिए है।