शहर के प्रमुख मार्गों के सिग्नल रेड होने पर वाहन चालकों को प्रचंड गर्मी में एक से डेढ़ मिनट तक खड़े रहना पड़ता है। सिग्नल पर कई चार पहिया वाहन भी खड़े रहते हैं। इन वाहनों के इंजन व एसी की गर्मी के चलते उनके आसपास ज्यादा गर्म हवा रहती है। इस कारण चौराहों पर तापमान एक-डेढ़ डिग्री ज्यादा रहता है। इसलिए दूसरे शहरों की तर्ज पर इंदौर में भी चौराहों व सड़कों पर अब धूप से बचने के लिए ग्रीन नेट का सहारा लिया जा रहा है।
क्षेत्रीय पार्षद की पहल पर फिलहाल वायएन रोड स्थित लैंटर्न चौराहे पर दो तरफ ग्रीन नेट लगाई गई है। तपती गर्मी में ट्रैफिक सिग्नल पर ग्रीन नेट के नीचे खड़े होकर वाहन चालक राहत महसूस कर रहे हैं। पहले लैंटर्न चौराहे पर पहले काफी पेड़ हुआ करते थे, लेकिन 20 साल पहले बनी बांड सड़क के लिए इस मार्ग से सैकड़ों पेड़ काट गए। गर्मी में लोग पेड़ों की घनी छाया को तरस रहे हैं और विकल्प के तौर पर प्लास्टिक की ग्रीन नेट का सहारा लिया जा रहा है। बीते तीन दिनों से इंदौर में पारा 41 डिग्री से ज्यादा है और दोपहर में जो लोग काम के सिलसिले में घरों से निकल रहे हैं, उन्हें तेज गर्मी और उमस से परेशान होना पड़ रहा है। धूप से बचाव के लिए ग्रीन नेट का प्रयोग अन्य चौराहों पर भी नगर निगम और पुलिस का ट्रैफिक विभाग कर सकता है।
रायपुर, भिलाई समेत कई शहरों में लगे ग्रीन नेट
रायपुर, भिलाई समेत देश के कई शहरों में चौराहों पर इस तरह की ग्रीन नेट लगाई गई है। इंदौर के 56 दुकान क्षेत्र के व्यापारियों ने ग्राहकों की सुविधा के लिए पूरी 56 दुकानों पर इस तरह की नेट लगाई है।
सालभर में काटे 4000 से ज्यादा पेड़
इंदौर के पांच प्रमुख चौराहों पर ब्रिज बन रहे हैं। इनमें से दो ग्रीन बेल्ट पर ही आकार ले रहे हैं। ब्रिज निर्माण में बाधक 4000 से ज्यादा पेड़ों को काटा गया। खजराना चौराहा और फूटी कोठी चौराहा पर ब्रिज के लिए ग्रीन बेल्ट का बड़ा हिस्सा उजाड़ा गया।