इंदौरवासी एक बार फिर मंगलवार को घर से निकलकर गंतव्य तक पहुंचने के लिए अपनी कारों के बजाय दूसरे विकल्प अपनाएंगे। स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति संदेश देने के लिए हर साल 22 सितंबर को नो कार डे मनाया जाता है।
इंदौर में बीते तीन साल से इसे मनाया जा रहा है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने नागरिकों से निजी वाहनों की जगह सिटी बस, ई-रिक्शा, साइकिल या पैदल यात्रा अपनाने की अपील की और कहा कि नो कार डे केवल एक दिन निजी कार का इस्तेमाल नहीं करने का अभियान नहीं, बल्कि स्वच्छ वायु, स्वस्थ जीवन, कम प्रदूषण और बेहतर यातायात व्यवस्था के लिए नागरिकों की सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश है।
इंदौर ने स्वच्छता, जनभागीदारी और जागरूक नागरिकों के प्रयासों से देश-दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है और इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए शहरवासी हर वर्ष नो कार डे में उत्साह से भाग लेते हैं। पिछले साल भी मंत्रियों ने कारों का काफिला छोड़कर ई-रिक्शा को अपनाया था, जबकि कई जनप्रतिनिधि व नेता मोटरसाइकिल से भ्रमण करते देखे गए थे।
इंदौर में तीन साल से नो कार डे मनाया जा रहा है। पिछले साल नो कार डे के कारण इंदौर में 1.80 लाख लीटर ईंधन की खपत कम हुई थी। इसमें करीब एक लाख लीटर पेट्रोल और 80 हजार लीटर डीजल शामिल था। सड़कों पर निजी कारों की संख्या में भी 30 प्रतिशत कमी देखी गई थी। वर्ष 2024 में भी करीब डेढ़ लाख लीटर ईंधन की बचत हुई थी और वायु गुणवत्ता में 38 प्रतिशत सुधार हुआ था।इंदौर में हर साल 22 सितंबर को नो कार डे मनाया जाता है।