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खड़े हनुमान: इंजीनियरिंग है या चमत्कार? 1 हजार प्रतिमाएं निकालने वाले विशेषज्ञ बोले- कुछ बातें विज्ञान से परे

Thu, 10 Sep 2026 04:41 PM IST
Arjun Richhariya न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

उज्जैन के श्री खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा को विस्थापित करने से पहले प्रशासन ने स्कैनिंग करवाई है। विशेषज्ञों का कहना है कि पूरी जांच प्रक्रिया के बाद ही सोच समझकर निर्णय लेना चाहिए। कुछ बातें विज्ञान से भी परे होती हैं। 
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खड़े हनुमान जी विशेषज्ञ बोले- स्केनिंग रिपोर्ट बिना प्रतिमा को छूना खतरनाक - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उज्जैन के श्री खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा को विस्थापित करने का मामला बढ़ता ही जा रहा है। मंदिर का बाहरी हिस्सा हटा दिया गया है लेकिन प्रतिमा को विस्थापित करने पर पूरा मामला अटक गया है। श्रद्धालु और संत समाज प्रतिमा को विस्थापित करने का विरोध कर रहे हैं और प्रशासन ने भी यह साफ कर दिया है कि प्रतिमा की वर्तमान स्थिति और संरचना का वैज्ञानिक परीक्षण कराया जाएगा। विशेषज्ञों की तकनीकी राय मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई पर विचार किया जाएगा। प्रशासन ने यह भी साफ कर दिया है कि अभी तक प्रतिमा को हटाने या हिलाने का कोई प्रयास नहीं किया गया है। इस विषय में हमने तकनीकी विशेषज्ञों और पुरातत्वविदों से बात की और जानने का प्रयास किया कि हकीकत क्या है? क्या यह कोई चमत्कार है या फिर प्राचीन काल की इंजीनियरिंग का कमाल है?
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क्या है मामला?
उज्जैन के सती गेट (बड़ा सराफा) स्थित प्राचीन खड़े हनुमान मंदिर को लेकर चल रही घटना इस समय आस्था और तकनीक के बीच चर्चा का बड़ा केंद्र बनी हुई है। आगामी सिंहस्थ महाकुंभ 2028 की तैयारियों के मद्देनजर शहर में सड़क चौड़ीकरण का कार्य चल रहा है, जिसके दायरे में यह मंदिर भी आया है। सोशल मीडिया और स्थानीय भक्तों के बीच यह चर्चा तेजी से फैली कि प्रशासन द्वारा मंदिर का बाहरी ढांचा तोड़े जाने के बाद जब लगभग 8 फीट ऊंची हनुमान जी की प्रतिमा को क्रेन और जेसीबी से हटाने का प्रयास किया गया, तो वह अपनी जगह से 1 इंच भी नहीं हिली। इस घटना के बाद मंदिर परिसर में अचानक हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। 

प्रशासन ने साफ की स्थिति
उज्जैन जिला प्रशासन और एसडीएम ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पर जेसीबी या क्रेन से जबरन मूर्ति उखाड़ने की जो बातें चल रही हैं, वे पूरी तरह सच नहीं हैं। प्रशासन का कहना है कि मूर्ति को विस्थापित करने के लिए कोई भी ऐसा प्रयास नहीं किया गया जिससे उसे क्षति पहुंचे।
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क्या है आगामी रणनीति?
प्रतिमा को सुरक्षित रखने और उसकी संरचना को समझने के लिए आईआईटी इंदौर के विशेषज्ञों की टीम को बुलाया गया है। टीम आधुनिक उपकरणों की मदद से जमीन और प्रतिमा के आधार की वैज्ञानिक स्कैनिंग और तकनीकी अध्ययन कर रही है। 

1 हजार मूर्तियां निकालने वाले विशेषज्ञ क्या बोले?
मंदसौर के सम्राट यशोधर्मन पुरातत्व संग्रहालय के संस्थापक कैलाशचंद्र पांडे ने 1 हजार से अधिक मूर्तियों को विस्थापित किया है। उन्होंने कहा कि मैंने बड़ी से बड़ी मूर्तियों के विस्थापन का कार्य किया है लेकिन इस तरह का मामला आज तक नहीं देखा। पांडे ने कहा कि प्राचीन काल में मूर्तियों को एक आधार के साथ में तैयार करने के बाद में स्थापित किया जाता था। उन्होंने बताया कि हमने मंदसौर के पशुपतिनाथ मंदिर के विकास के दौरान 12 फिट की सहस्त्र लिंग की प्रतिमा को विस्थापित किया था। उसमें तीन फिट का आधार था। हमने मूर्ति को आधार के साथ में निकाला और दूसरी जगह विस्थापित किया। पांडे ने कहा कि मूर्ति को आधार के साथ में ही निकालना होता है। यदि आधार में कोई परेशानी आई तो मूर्ति को नुकसान हो सकता है। 



किस प्रक्रिया से निकलेगी प्रतिमा?
पांडे ने बताया कि प्रतिमा को निकालने के लिए उसके चारों तरफ खुदाई की जाती है। आधार के साथ ही उसका निचला हिस्सा जब पूरी तरह से दिखने लगता है तब वहां पर लकड़ियों का एक अलग आधार बनाया जाता है। इस पर प्रतिमा को रखा जाता है और उस स्थान से धीरे धीरे सरकाया जाता है। लकड़ियों के आधार पर रखकर ही प्रतिमा को निकाला जाता है और फिर दूसरे स्थान पर विस्थापित कर दिया जाता है। पांडे ने कहा कि विदेशों में तो इस पद्धति से पूरे के पूरे महल ही विस्थापित किए गए हैं। 

फिर भी परेशानी आई तो हो सकता है, कोई चमत्कार ही हो
पांडे ने कहा कि इन सब प्रयासों के बाद भी यदि प्रतिमा को विस्थापित करने में कोई परेशानी आई तो हो सकता है कोई चमत्कार ही हो। कुछ बातें विज्ञान से भी परे होती हैं। 

क्या कहते हैं आर्किटेक्ट?
आर्किटेक्ट अतुल सेठ ने कहा कि विकास कार्यों के दौरान कई बार मूर्तियों को एक स्थान से दूसरे स्थान विस्थापित करना पड़ता है। अधिकांशतः यह देखा गया है कि किसी भी मूर्ति के विस्थापन में कोई परेशानी नहीं आती है। उज्जैन में खड़े हनुमान की मूर्ति को किस तरह से स्थापित किया गया था और उसमें क्या पद्धति का उपयोग किया गया था यह देखना जरूरी है। स्थानीय प्रशासन भी अभी यह पता कर रहा है कि किस तरह से मूर्ति को स्थापित किया गया था। सीधे मशीनों से मूर्ति निकालने से कई बार प्रतिमा को नुकसान होने की आशंका होती है। एक बार मिट्टी और मूर्ति के नीचे की स्कैनिंग के बारे में जानकारी मिल जाएगी तो प्रशासन उसे दूसरे स्थान पर स्थापित कर सकता है। 

मूर्ति किस धातु से बनी यह भी पता करना चाहिए
अतुल सेठ ने कहा कि मूर्ति किस धातु से बनी है यह भी ठीक तरह से पता करना होगा। इससे यह अनुमान लग जाता है कि मूर्ति कितनी मजबूत होगी। इससे विस्थापन के समय योजना बनाने में मदद मिलेगी। 
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