सार
इस बार इंदौर के छह नेता चुनाव लड़ रहे है। इनमें सज्जन सिंह वर्मा, समंदर पटेल, भंवर सिंह शेखावत कांग्रेस से चुनाव लड़ रहे है, जबकि राजेश सोनकर, राजकुमार मेव को भाजपा ने टिकट दिया है। सोनकर तो इंदौर के जिला भाजपा अध्यक्ष भी है।
प्रदेश की औद्योगिक राजधानी कहे जाने वाले इंदौर ने प्रदेश को कई नेता भी दिए है। हर बार विधानसभा चुनाव में इंदौर के नेता अपने गृहक्षेत्र से 100-150 किलोमीटर दूर जाकर चुनाव लड़ते है। इनमें से ज्यादातर चुनाव जीत कर विधायक भी बन जाते है। इस बार भी इंदौर के छह नेता अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में जाकर चुनाव लड़े है और उनकी प्रतिष्ठा दांव पर है। अब 3 दिसंबर को मतगणना के बाद पता चलेगा कि मतदाताओं की कसौटी पर इंदौर नेता कितने खरे उतरे।
इस बार इंदौर के छह नेता चुनाव लड़ रहे है। इनमें सज्जन सिंह वर्मा, समंदर पटेल, भंवर सिंह शेखावत कांग्रेस से चुनाव लड़ रहे है, जबकि राजेश सोनकर, राजकुमार मेव को भाजपा ने टिकट दिया है। सोनकर तो इंदौर के जिला भाजपा अध्यक्ष भी है। वे जिस सोनकच्छ सीट से चुनाव लड़ रहे है। वहां भाजपा और कांग्रेस इंदौरी नेताओं को ही टिकट देती आ रही है।
कांग्रेस इंदौर के वर्मा परिवार को टिकट देती है। इस सीट से सबसे ज्यादा सज्जन सिंह वर्मा चुनाव लड़कर विधायक बने है, जबकि एक बार भाजपा से राजेंद्र वर्मा ने चुनाव जीता था। पिछले चुनाव मेें भाजपा ने राजेंद्र को टिकट दिया था, लेकिन वे चुनाव हार गए। इस सीट पर चाहे जो भी जीते, इंदौरी नेता ही विधायक बनेगा।
इस बार गुड्डू लड़ रहे है निर्दलीय चुनाव
इंदौर के पार्षद रहे प्रेमचंद गुड्डू इंदौर जिले के सांवेर से विधायक रहे चुके है। इसके बाद उन्होंने मालवा निमाड़ की कई सीटों से दावेदारी जताई और उन्होंने व उनके पुत्र ने अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों से चुनाव लड़ा है। इस बार गुड्डू ने आलोट से टिकट मांगा था, लेकिन उन्हें कांग्रेस ने टिकट नहीं दिया तो वे निर्दलीय चुनाव में खड़े हो गए। उनका बेटा अजीत बौरासी आलोट और उज्जैन जिले की सीट से भी चुनाव लड़ चुका है,लेकिन वह विधायक नहीं बन पाया।
दल बदल कर लाए टिकट
इंदौर के नेता भंवर सिंह शेखावत भाजपा छोड़कर कांग्रेस में गए और पार्टी ने उन्हें बदनावर से टिकट दिया। वहां इस बार कांटे की टक्कर है। इसके अलावा समंदर पटेल पहले भाजपा में थे, वे कांग्रेस में शामिल हुए और उन्हें जावद से टिकट दिया गया है। इसके अलावा राजकुमार मेव भी महेश्वर से दो बार चुनाव लड़ चुके है। पिछले चुनाव में वे बागी उम्मीदवार बनकर चुनाव लड़े थे। इस बार भाजपा ने उन्हें टिकट दिया है।