प्रदेश में पंजीयन विभाग ने नौ साल बाद दस्तावेजों के पंजीकरण के लिए नया सॉफ्टवेयर संपदा 2.0 लॉन्च किया है, लेकिन यह सुधार आम लोगों और पेशेवरों के लिए परेशानी का कारण बन गया है। सॉफ्टवेयर से जुड़ी तकनीकी दिक्कतों ने दस्तावेज पंजीकरण की प्रक्रिया को धीमा कर दिया है, जिससे खासकर बुजुर्ग, नौकरीपेशा, वकील और रियल एस्टेट से जुड़े लोग प्रभावित हो रहे हैं। इंदौर में पहले जहां एक सब-रजिस्ट्रार के पास प्रतिदिन 45 से 75 दस्तावेज रजिस्टर्ड हो जाते थे, अब यह संख्या घटकर 20 से 25 पर सिमट गई है।
रजिस्ट्री, मॉर्गेज और वसीयत जैसे कार्यों के लिए लोगों को 8 से 10 दिनों की वेटिंग झेलनी पड़ रही है। वर्तमान में, यदि इंदौर में किसी व्यक्ति को रजिस्ट्री या मॉर्गेज लोन की प्रक्रिया पूरी करनी है, तो उसे 17 से 18 दिसंबर का स्लॉट ही मिल रहा है। पहले जहां एक सब-रजिस्ट्रार को प्रतिदिन 45 से 55 स्लॉट मिलते थे, अब यह संख्या घटकर सिर्फ 18 रह गई है। इंदौर में 90 प्रतिशत रजिस्ट्रियां लोन आधारित होती हैं और इनकी प्रक्रिया मॉर्गेज के बाद पूरी होती है। वर्तमान स्थिति यह है कि एक दिन में अधिकतम 13 रजिस्ट्रियां और 12 मॉर्गेज ही पूरे हो पा रहे हैं।
प्रदेश के अन्य शहरों में भी स्थिति समान है। भोपाल में 13 से 14 दिसंबर, उज्जैन में 17 दिसंबर, देवास में 12 दिसंबर और रतलाम में 12 दिसंबर के स्लॉट ही उपलब्ध हैं। 28 नवंबर से 4 दिसंबर तक के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में प्रतिदिन 2000 से 2400 के बीच दस्तावेज ही रजिस्टर्ड हो पा रहे हैं। यह नया सॉफ्टवेयर पंजीयन प्रक्रिया को आसान और तेज करने के उद्देश्य से लॉन्च किया गया था, लेकिन फिलहाल इसके कारण लोगों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है, जिससे सुधार की आवश्यकता स्पष्ट है।