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Indore News: प्राकृतिक जंगल में मानव निर्मित वन बनाएगा निगम, रहवासी बोले जैसा है रहने दें, बर्बाद न करें

Sat, 03 May 2025 06:02 PM IST
अर्जुन रिछारिया अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर

सार

Indore News: पोलोग्राउंड क्षेत्र में बने प्राकृतिक जंगल में आई नगर निगम की भारत वन योजना, रहवासी बोले जैसा जंगल है रहने दें, नेहरू और रीजनल पार्क पहले ही बर्बाद कर चुके।
 
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मंदिर में प्रकृति को बचाने के लिए चिंतन। - फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
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विस्तार
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इंदौर नगर निगम पोलोग्राउंड में भारत वन और तालाब बनाने की योजना लेकर आया है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव के मुताबिक यह वन 36 एकड़ में तैयार होगा। भार्गव का कहना है कि शहर के मध्य एक ऐसा वन तैयार किया जाए जो शुद्ध पर्यावरण के साथ-साथ इंदौर के लिए ‘लंग्स’ का कार्य करे। इस क्षेत्र को पूरी तरह हरित क्षेत्र में बदला जाएगा। साथ ही यहां एक बड़ा तालाब भी निर्मित किया जाएगा। यह वन शहर के मध्य हिस्से में कान्ह नदी के किनारे बनेगा। महापौर की इस घोषणा और यहां पर किए दौरे के बाद से रहवासियों का विरोध शुरू हो गया है। 
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कई कॉलोनी के रहवासी पहुंचे
समर्थ मठ पंत वैद्य कालोनी में कई कॉलोनी के रहवासी इकट्ठे हुए और उन्होंने एक सुर में इस योजना का विरोध किया। बैठक में जती कॉलोनी, रामबाग, नारायण बाग से लेकर तिलक पथ व आसपास के क्षेत्र के रहवासियों ने पुरजोर तरीके से नगर निगम की इस योजना का विरोध किया। 
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अब कोई छेड़छाड़ नहीं सहेंगे
पर्यावरणविद डॉ. दिलीप वाघेला ने कहा कि इस संपूर्ण क्षेत्र के कारण ही आसपास तापमान बेहद कम रहता है और हवा भी बेहद साफ रहती है। यहां पर किसी भी प्रकार का प्रयोग नहीं करना चाहिए। अनुराग फड़के ने कहा आज यहां पर कई कालोनियों के रहवासी एकजुट हुए हैं, हम चाहते हैं कि कोई भी वहां पर किसी भी तरह की छेड़छाड़ न करे। 
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नेहरू पार्क और कान्ह नदी को बर्बाद कर दिया, ट्रांसप्लांट भी फेल है, बिल्कुल न करें
नगर निगम रीजनल पार्क, मेघदूत गार्डन और नेहरू पार्क को तो ठीक से संभाल नहीं पाया और न ही कान्ह नदी को साफ कर पाया। अब इस 38 एकड़ के सघन हरियाली वाले क्षेत्र के पेड़ उखाड़कर पुनः नए तरीके से पौधारोपण करना कहां का तर्क है? इस क्षेत्र के सभी रहवासी स्वयं इस प्राकृतिक वन में वृक्षारोपण कर सकते हैं। इसमें पुराने पेड़ उखाड़कर नए लगने का कोई औचित्य नहीं है। वृक्षों का पुनर्स्थापन 95% असफल रहता है तो निगम द्वारा वृक्षों का पुनर्स्थापन भी खोखला दावा है। अशोक पाटणकर, नेताजी मोहिते, नितीन शुक्ल, अनिल मोढक, सुधीर दांडेकर, सुबोध काटे, वैशाली खरे, रवि आयंगर, शुभांगी काटे, स्वाती बोरगांवकर ने भी अपने विचार रख निगम की योजना का विरोध तर्क संगत दिया।
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