सार
इस बार प्रभातफेरी की थीम अयोध्या मंदिर रखी गई है। इस माह अयोध्या में मंदिर का लोकार्पण होगा। प्रभातफेरी में अयोध्या में बन रहे राम मंदिर की प्रतिकृति भी रहेगी। जो 40 फीट लंबी, 15 फीट चौड़ी और 21 फीट ऊंची रहेगी।
गुरुवार को निकलेगी रणजीत हनुमान की प्रभातफेरी।
- फोटो : amar ujala digital
इंदौर में चार दिनी रणजीत अष्टमी महोत्सव के समापन चार जनवरी को प्रभात फेरी के साथ होगा। प्रभातफेरी सुबह 5 बजे निकलेगी। जिसमें हजारों लोग शामिल होंगे। पिछले साल 50 हजार से ज्यादा लोगों ने प्रभातफेरी में हिस्सा लिया था। प्रभातफेरी में ज्यादातर भक्त भगवा रंग के वस्त्र धारण कर नंगे पैर शामिल होंगे। प्रभातफेरी में आकर्षण का केंद्र अयोध्या में बन रहे राम मंदिर की वृहद प्रतिकृति होगी।
इस बार प्रभातफेरी की थीम अयोध्या मंदिर रखी गई है। इस माह अयोध्या में मंदिर का लोकार्पण होगा। प्रभातफेरी में अयोध्या में बन रहे राम मंदिर की प्रतिकृति भी रहेगी। जो 40 फीट लंबी, 15 फीट चौड़ी और 21 फीट ऊंची रहेगी।
प्रतिकृति का निर्माण बंगाल के 10 कलाकारों द्वारा एक माह में किया गया है। इसका निर्माण लोहा, लकड़ी, कपड़ा, थर्माकोल से किया गया है। यह प्रतिकृति 16 पहिए वाली गाड़ी पर रखकर झांकी की तरह प्रभातफेरी में शामिल की रहेगी। प्रभातफेरी रणजीत हनुमान मंदिर से शुरू होकर उषा नगर मार्ग, महूनाका, अन्नपूर्णा माता मंदिर, नरेंद्र तिवारी मार्ग होते हुए मंदिर पहुंचेगी।
प्रभातफेरी के स्वागत के लिए 100 से ज्यादा स्वागत मंचों लगाए गए है। बुधवार रात से ही मंच मार्ग के दोनों तरफ लगना शुरू हो गए थे। हर स्वागत मंच पर प्रभु श्रीराम के दर्शन होंगे। प्रभातफेरी मार्ग को भगवा ध्वजाओं से सजाए गया है। रणजीत भक्त मंडल के 2 हजार सदस्य प्रभातफेरी की व्यवस्था संभालेंगे। वे खुद नंगे पैर यात्रा में मोटा रस्सा पकड़ कर चलेंगे। पुजारी पं. दीपेश व्यास ने बताया कि इस साल रणजीत अष्टमी महोत्सव को भगवान श्रीराम को समर्पित किया है। पूरे मार्ग पर भगवा पताकाएं लहराएगी। प्रभातफेरी भ्रमण पांच से छह घंटे का होगा।
प्रभातफेरी की पंरपरा 137 साल पुरानी
रणजीत हनुमान मंदिर से प्रभातफेरी की परंपरा 137 साल से पुरानी है। इसकी शुरुआत पं. भोलाराम व्यास ने की थी। उस वक्त हाथ में रणजीत हनुमान की तस्वीर लेकर मंदिर परिसर में ही पैदल परिक्रमा लगाई जाती थी। इसके बाद प्रभातफेरी ठेला गाड़ी पर निकालने लगी। 2012 के बाद प्रभातफेरी बड़े पैमाने पर निकलने लगी। रणजीत बाबा को रथ में बैठाकर घूमाया जाने लगा। वर्ष 2014 के बाद स्वर्ण रथ पर प्रभातफेरी निकाली जाने लगी।