मेरी बेटी जन्म के समय बिल्कुल स्वस्थ थी। उसे कुछ शारीरिक परेशानियां थी जिसके चलते हम उसे धार से इंदौर लेकर आए। डॉक्टर ने कहा कि सर्जरी के बाद वह स्वस्थ हो जाएगी। हमें पता ही नहीं चला कि जिस एनआईसीयू में वह भर्ती है वहां पर उसे चूहे काट रहे हैं। उसकी मृत्यु के बाद भी हमें सही जानकारी नहीं दी गई। जब बच्ची का शव मिला और उसकी अंगुलियां चूहों के द्वारा खाई हुई मिली तो हमारे रोंगटे खड़े हो गए। हम यह सोच सोचकर रोते रहते हैं कि उस मासूम ने कितना दर्द झेला और हमें पता भी नहीं चला। आज पूरी सरकार और प्रशासन उन सभी जिम्मेदारों को बचाने में लगे हुए हैं जिनकी वजह से हमारी बच्ची की जान चली गई। यह बातें अमर उजाला से बातचीत में उस बच्ची की मां ने कही जिसने प्रदेश के सबसे प्रमुख सरकारी अस्पताल एमवायएच के एनआईसीयू में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। जब शव मिला तो उसकी अंगुलियां चूहों ने खा ली थी।
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धूप और बारिश में धरने पर बैठी है मां
मां मंजू ने बताया कि हमें बाद में बताया गया कि आपको पैसे दे देंगे और कुछ चाहिए तो वह भी दे देंगे। हमें कुछ नहीं चाहिए। हम तीन दिन से यहां पर बारिश और धूप में धरने पर बैठे हैं। हमें पता चला है कि पहले भी इस अस्पताल में नवजात बच्चों की आग में जलने से मौत हो गई थी। अगर इसी तरह से गरीबों के बच्चे मरते रहे तो हम इलाज करवाने कहां जाएंगे। जिस दिन नेताओं और अधिकारियों को जेल होगी और जिम्मेदार पदों पर बैठे हुए बड़े लोग जेलों में होगें तभी यह घटनाएं रुकेंगी।
पिता ने कहा हम नहीं हटेंगे
बच्ची के पिता देवराम ने कहा कि हमें हटाने के लिए पुलिस और प्रशासन पूरे प्रयास कर रहा है। हमने अपनी बच्ची को खो दिया लेकिन अब हम यहां पर किसी पद या पैसे के लिए नहीं आए हैं। हम चाहते हैं कि अब इस तरह की कोई घटना किसी गरीब के साथ में न हो। हम यहां धरने पर बैठे रहेंगे।
डीन और अधीक्षक को सस्पेंड करने की मांग
बच्ची के माता और पिता के साथ विरोध कर रहे लोगों की मांग है कि एमवाएच के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया और अधीक्षक डॉ. अशोक यादव को सस्पेंड किया जाए। कर्मचारियों को सस्पेंड करने से व्यवस्था नहीं बदलेगी। लोकेश मुजाल्दा ने कहा कि हमारे साथ कई और भी लोग यहां पर आ रहे हैं। यह धरना और आंदोलन बढ़ता ही जाएगा। इस बार हम दोषियो को सस्पेंड किए बिना जाएंगे नहीं।
डॉक्टर और प्रदर्शनकारी आमने सामने
आज दोपहर में प्रदर्शनकारी और एमवायएच के डॉक्टर आमने सामने हो गए। डॉक्टरों का कहना था कि यदि प्रदर्शनकारी नहीं हटेंगे तो काम नहीं करेंगे। विवाद बढ़ता देख दोपहर में बड़ी संख्या में पुलिस बुलाई गई और दोनों पक्षों को दूर किया गया।