खबर के लिए प्रतिकात्मक फोटो - चैटजीपीटी
- फोटो : अमर उजाला, इंदौर
ऑर्गन डोनेशन की प्रक्रिया और इससे जुड़े सामाजिक मुद्दों पर हाल ही में इंदौर के जूपिटर हॉस्पिटल में हुई एक घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए। एक 37 वर्षीय ब्रेनडेड महिला, जो अस्पताल में भर्ती थी, के परिजनों ने जरूरतमंद मरीजों की जिंदगी बचाने के लिए अंगदान की सहमति दी थी। इस प्रक्रिया के तहत महिला के किडनी, लिवर, फेफड़े और अन्य अंगों को शहर के अलग-अलग अस्पतालों में जरूरतमंद मरीजों तक पहुंचाने के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाने की तैयारी चल रही थी। जिला प्रशासन, मेडिकल टीम, पुलिस और अन्य संबंधित विभाग पूरी तरह से तैयार थे। मगर, आखिरी समय पर महिला के एक रिश्तेदार द्वारा किए गए विरोध ने पूरे प्रयासों पर पानी फेर दिया।
परिजन ने दे दी थी सहमति, एक रिश्तेदार ने हंगामा खड़ा कर दिया
घटना की शुरुआत तब हुई जब महिला के परिजनों ने काउंसलिंग के बाद ऑर्गन डोनेशन के लिए सहमति दी थी। मुस्कान संस्था के काउंसलर जीतू बगानी और उनकी टीम ने इस सहमति को सुनिश्चित करने के लिए परिजनों के साथ मिलकर काफी प्रयास किए थे। ब्रेनडेड महिला के अंगों को जरूरतमंद मरीजों तक पहुंचाने के लिए एक हाई-अलर्ट प्लान तैयार किया गया था, जिसमें संभागायुक्त, मेडिकल कॉलेज डीन, डॉक्टर्स और सर्जन की पूरी टीम शामिल थी। ग्रीन कॉरिडोर बनाने की प्रक्रिया पूरी तरह तैयार थी। लेकिन अचानक, महिला के एक रिश्तेदार ने ऑर्गन डोनेशन का विरोध करना शुरू कर दिया और अस्पताल में हंगामा खड़ा कर दिया। इस विरोध ने न केवल परिजनों के फैसले को प्रभावित किया बल्कि प्रशासन और मेडिकल टीम के प्रयासों को भी विफल कर दिया।
विधायक ने भी समझाया पर नहीं माने
रिश्तेदार को समझाने के लिए काउंसलर ने क्षेत्रीय विधायक तक से संपर्क किया लेकिन उनकी बातों का भी कोई असर नहीं हुआ। रिश्तेदार की जिद के कारण ग्रीन कॉरिडोर बनाने की प्रक्रिया रद्द करनी पड़ी और सभी जरूरतमंद मरीजों और उनके परिजनों की उम्मीदें टूट गईं। इन मरीजों में से कई गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे जिनकी जिंदगी ऑर्गन ट्रांसप्लांट पर निर्भर थी। डॉक्टर्स और सर्जन, जो कई घंटों से ऑपरेशन की तैयारियों में जुटे थे उन्हें भी निराशा का सामना करना पड़ा।
मिथकों और जागरूकता की कमी
यह घटना ऑर्गन डोनेशन से जुड़े समाज में व्याप्त मिथकों और जागरूकता की कमी को उजागर करती है। ब्रेनडेड व्यक्ति के अंग कई लोगों की जान बचा सकते हैं, लेकिन व्यक्तिगत भावनाओं और जिद के कारण ऐसे नेक काम में रुकावट आ जाती है। समाज को इस विषय पर अधिक संवेदनशील और जागरूक होने की जरूरत है। ऑर्गन डोनेशन के महत्व को समझाने के लिए व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है। इसके साथ ही, यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि अंगदान में बाधा डालने वाले किसी भी अवांछित हस्तक्षेप को रोका जा सके। इसके लिए समाज के प्रभावशाली व्यक्तियों और धार्मिक नेताओं को इस मुद्दे पर समर्थन और जागरूकता फैलाने के लिए आगे आना चाहिए। यह घटना हमें सिखाती है कि ऑर्गन डोनेशन न केवल एक मानवतावादी कदम है, बल्कि यह दूसरों की जिंदगी बचाने का एक अनमोल अवसर भी है। इसे बाधित करने की बजाय इसे बढ़ावा देना चाहिए ताकि जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन मिल सके।