इंदौर से नहीं बना भाजपा का प्रदेशाध्यक्ष।
- फोटो : अमर उजाला
प्रदेश भाजपा के नए अध्यक्ष के रूप में हेमंत खंडेलवाल की ताजपोशी हो गई है। क्षेत्रीय समीकरणों के हिसाब से छिंदवाड़ा बेल्ट का पलड़ा भारी रहा। अब तक सबसे ज्यादा आठ बार मालवा निमाड़ से भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष चुने जा चुके हैं, लेकिन मालवा निमाड़ के सबसे बड़े शहर इंदौर से कभी भी भाजपा का प्रदेशाध्यक्ष नहीं चुना गया, जबकि इंदौर ने भाजपा को कई बड़े नेता दिए, जो केंद्र की राजनीति में भी चमके, लेकिन कभी प्रदेश अध्यक्ष नहीं बन सके।
विधानसभा चुनाव के समय प्रदेश भाजपा में बदलाव की खूब चर्चा थी। तब इंदौर के कद्दावर नेता कैलाश विजयवर्गीय का नाम भी भाजपा प्रदेशाध्यक्ष की दौड़ में आगे था, लेकिन केंद्रीय नेतृत्व ने वीडी शर्मा पर भरोसा जताया। शर्मा का कार्यकाल पूरा होने के बाद अब प्रदेश भाजपा को हेमंत खंडेलवाल के रूप में नया कप्तान मिला है। 15 साल पहले पूर्व लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन का नाम भी प्रदेशाध्यक्ष के लिए चला था, लेकिन वे भी नहीं बन पाईं।
इंदौर से राजेंद्र धारकर, कृष्णमुरारी मोघे जैसे नेता संगठन और सरकार में महत्वपूर्ण पदों पर रहे, लेकिन वे भी कभी प्रदेशाध्यक्ष नहीं बन पाए। हालांकि, इंदौर के पड़ोसी जिले धार से विक्रम वर्मा और उज्जैन से सत्यनारायण जटिया प्रदेशाध्यक्ष रह चुके हैं। इसके अलावा खंडवा के नंदकुमार चौहान को भी भाजपा प्रदेशाध्यक्ष बनने का मौका मिला। इस बार क्षेत्रीय समीकरणों के हिसाब से इंदौर या मालवा निमाड़ को यह मौका नहीं मिलने वाला था, क्योंकि प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का मालवा के उज्जैन से नाता हैं।