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Indore News: अपना दूध दान कर माताओं ने बचाई 1500 अनजान बच्चों की जान, एमपी का मदर मिल्क बैंक बना मिसाल

Sun, 10 May 2026 05:12 AM IST
Arjun Richhariya न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

Indore News: इंदौर का सरकारी एमटीएच अस्पताल मदर मिल्क बैंक के क्षेत्र में देश के लिए मिसाल पेश कर रहा है। तीन साल में अब तक महिलाओं ने लगभग 350 लीटर दूध दान किया है, जिससे करीब 1500 नवजात शिशुओं को नया जीवन मिला है।
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इंदौर - फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
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विस्तार
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इंदौर के सरकारी एमटीएच में मदर मिल्क बैंक का संचालन हो रहा है। इंदौर का मदर मिल्क बैंक देश में रोल मॉडल बन चुका है। साल 2023 में सरकारी एमटीएच में खोले गए इस सेंटर से अब तक करीब डेढ़ हजार से अधिक नवजातों की जान बचाई गई है। सेंटर में काउंसलिंग के बाद 1500 से अधिक महिलाओं ने करीब 350 लीटर दूध डोनेट किया है। एमटीएच प्रबंधन के मुताबिक, 2023 से मिल्क बैंक शुरू होने के बाद नवजात मृत्यु दर 25% से घटकर 10 प्रतिशत तक आ गई है।
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दो साल पहले हुई थी इस बैंक की शुरुआत
दरअसल, मां का दूध बच्चों के लिए बहुत ही जरूरी है। अगर किन्हीं कारणों के चलते न्यू बोर्न बेबी को मां का दूध नहीं मिले और वह कमजोर, बीमार, अनाथ या प्री टर्म हो तो उसकी मौत हो जाती है। इसी को ध्यान में रखते हुए दो साल पहले इंदौर में प्रदेश के पहले मदर मिल्क बैंक की शुरुआत हुई। सरकारी एमटीएच में यह मिल्क बैंक खोला गया। इसका पैटर्न कुछ ब्लड बैंक जैसा ही है, लेकिन डोनेट किए दूध को स्टोर करना और फिर उसे संबंधित बच्चों को उपलब्ध कराने की प्रोसेस भी अद्भुत है। इसके पूर्व संबंधित प्रसूता जिसे अपने बच्चे को दूध पिलाने के अलावा अन्य बच्चों को भी डोनेट करने के लिए उसकी काउंसलिंग की जाती है। इन दो साल में इस काम में तेजी आई है। 1500 से ज्यादा बच्चों को मां का दूध उपलब्ध कराया गया। प्रदेश के इकलौते इस मदर मिल्क बैंक से मालवा-निमाड़ और प्रदेश ही नहीं बल्कि राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र के बच्चों को जन्म से ही किसी अन्य मां का पौष्टिक दूध मिला।

आखिर क्यों पड़ी मदर मिल्क बैंक की जरूरत
देश के कई शहरों और कस्बों में मां का दूध नहीं मिलने से नवजातों की मृत्यु दर बढ़ने लगी थी। इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) ने मध्यप्रदेश में इंदौर को मदर मिल्क बैंक के लिए उपयुक्त माना। साल 2022 में करोड़ों की लागत से इंदौर में महाराजा तुकोजीराव हॉस्पिटल (MTH) का निर्माण हुआ, जो मेटरनिटी हॉस्पिटल है। इसके साथ ही एमवाई अस्पताल का गायनिक विभाग भी यहीं शिफ्ट कर दिया गया। इसी दौरान एनएचएम और एमजीएम मेडिकल कॉलेज की मदद से कॉम्प्रिहेंसिव लेक्टेशन मैनेजमेंट सेंटर (CLMC) यानी मदर मिल्क बैंक की शुरुआत की गई। चूंकि उस समय कोरोना का अंतिम दौर चल रहा था, इसलिए इसकी शुरुआत बेहतर नहीं रही। लेकिन मार्च 2023 से इसका संचालन पूरी तरह सक्रिय हो गया, जिससे जरूरतमंद नवजातों को समय पर मां का दूध उपलब्ध कराया जा रहा है।
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प्रदेश के अन्य जिलों में भी विस्तार की तैयारी
एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डाक्टर अरविंद घनघोरिया ने बताया कि प्रदेश के अन्य सरकारी अस्पतालों के लिए एमटीएच रोल मॉडल है , NHM द्वारा लगातार इसका रिव्यू किया जा रहा है एवं अब प्रदेश के अन्य मेडिकल कॉलेजों के अधीन सरकारी अस्पतालों में भी मदर मिल्क बैंक की स्थापना की जाएगी। इसके लिए इंदौर का मदर मिल्क बैंक रोल मॉडल रहेगा। इस दिशा में प्रोसेस शुरू हो चुकी है। डीन घनघोरिया ने कहा प्रीमैच्योर या SNCU (स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट) में भर्ती गंभीर नवजातों को इंफेक्शन का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। अगर इन्हें समय पर मां का दूध मिल जाए तो उनकी जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। कई बार बच्चा अनाथ होता है, मां की मौत हो जाती है, या किसी कारणवश दूध नहीं बनता। ऐसे में मां का दूध मिलना मुश्किल हो जाता है। इन्हीं हालातों के लिए मदर मिल्क बैंक की शुरुआत की गई, ताकि किसी दूसरी मां के पोषक दूध से भी नवजात को नया जीवन मिल सके।

चार राज्यों के नवजातों को मिला जीवनदान
इंदौर के एमटीएच अस्पताल में प्रसूताओं के लिए करीब 150 बेड की व्यवस्था है, जिसमें नवजात शिशुओं के लिए भी पर्याप्त सुविधा है। साथ ही यहां SNCU (स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट) की क्षमता लगभग 60 बेड की है। यहां सिर्फ इंदौर ही नहीं, बल्कि भोपाल, ग्वालियर, मंदसौर, गुना, आगर मालवा, झाबुआ, खंडवा, बुरहानपुर सहित मालवा-निमाड़ के कई जिलों की महिलाएं और उनके नवजात शिशु भर्ती होते हैं। इसके अलावा गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र से भी सीमाओं से लगे शहरों से भी महिलाएं इलाज और प्रसव के लिए यहां पहुंचती हैं। इस प्रकार 1500 से ज्यादा बच्चों को नया जीवन मिला है। मां का दूध डोनेट करने के लिए बीते 3 साल में यहां 20 हजार से ज्यादा प्रसूता महिलाओं की काउंसलिंग की गई। इसमें से 1500 से ज्यादा महिलाओं ने अपना दूध डोनेट किया। इसकी मात्रा 350 लीटर से ज्यादा है। जिससे करीब 1500 बच्चों को नया जीवन मिला।
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