पीथमपुर में छह माह पहले जलाए गए 900 टन कचरे की राख के निपटान का रास्ता साफ हो गया है। यूका कचरे की राख को दफनाने पर लगी रोक का आदेश हाईकोर्ट ने वापस लिया है।
सरकार ने रोक के आदेश की समीक्षा के लिए कोर्ट में आवेदन प्रस्तुत किया था। कोर्ट ने सरकार को पूर्व में पारित आदेश के अनुसार प्रक्रिया अपनाने के निर्देश जारी किये है।साल 2004 में आलोक प्रताप सिंह ने यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे के विनष्टीकरण की मांग करते हुए जनहित याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता की मृत्यु के बाद हाईकोर्ट मामले की सुनवाई संज्ञान याचिका के रूप में कर रही है। पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से हाईकोर्ट के बताया गया था कि जहरीले कचरे का विनष्टीकरण सफलतापूर्वक पीथमपुर में कर दिया गया है।
जहरीले कचरे से लगभग 900 मीट्रिक टन राख व अवशेष एकत्रित हुआ है। हाईकोर्ट में एक अन्य याचिका दायर करते हुए कहा गया था कि यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे की राख में रेडियो एक्टिव पदार्थ सक्रिय हैं, जो चिंता का विषय है। राख में मरकरी है, जिसे नष्ट करने की तकनीक सिर्फ जापान व जर्मनी के पास है। हाईकोर्ट ने उक्त याचिका की सुनवाई मुख्य याचिका के साथ किये जाने के आदेश जारी किये गये थे।
पहले भी दफन किया जा चुका है 40 टन कचरा
पीथमपुर में पहले भी यूनियन कार्बाइड का कचरा 2008 में दफन किया गया था।पांच हजार से ज्यादा लोगों को मौत की नींद सुलाने वाले भोपाल की यूनियन कार्बाइड फैक्टरी का 337 टन कचरा पीथमपुर के भस्मक में जला दिया गया, लेकिन उसकी राख हमेशा के लिए पीथमपुर में दफन होगी। इसे लेकर आसपास के रहवासी चिंतित है।
कचरा जलाने से बची राख को बीते पांच माह से कंपनी के परिसर में एक प्लेटफार्म पर रखा गया है। उस राख की भी विशेषज्ञों ने जांच की। राख को दफनाने के लिए एक तालाबनुमा गड्ढा खोदा गया है।बची हुई राख में मर्करी, निकल, जिंक, कोबाल्ट, मैग्जीन सहित अन्य तत्व है, जहां इस कचरे को दफन किया जाना है। उसके आधा किलोमीटर दायरे में आबादी क्षेत्र है। वहां के रहवासी बोरिंगों के पानी का उपयोग नहीं करते है, क्योकि बोरिंग भी दूषित हो चुके है। 900 टन राख के लिए काले रंग की एचडीपीई लाइनर बिछाई जा रही है,ताकि राख मिट्टी के संपर्क में न आए और राख का रिसाव जमीन में न हो। राख दफनाए जाने का मामला कोर्ट में भी है।