Indore News: रसोमा चौराहे पर यात्रियों से भरी बस गड्ढे में धंस गई। यशवंत सागर के गेट खोलने पड़े और हवा बंगला, प्रजापत नगर समेत कई क्षेत्रों में जलभराव से लोगों को भारी दिक्कतें झेलनी पड़ीं।
शनिवार को हुई तेज बारिश ने नगर निगम की तैयारियों की पोल खोल दी। देर रात तक शहर की कई बस्तियों में पानी भरने से हालात बिगड़े रहे। घरों में पानी और कीचड़ भर जाने से लोग परेशान रहे। निगम की टीमें रातभर बड़े मोटर पंप लगे वाहनों से पानी निकालती रहीं, लेकिन 20 से अधिक गाड़ियां भी कम पड़ गईं। सड़कों पर चारों तरफ की गई सड़कों की ब्लाकिंग और पुराने नालों को पूरी तरह से बंद करने से शहर में भरने वाला पानी बाहर ही नहीं निकल पाता। रातभर निगम की टीम ड्रेनेज के ढक्कन हटाती रही और पानी को निकाला गया।
पार्षद लगातार फोन लगाते रहे
कुछ दिन पहले ही नगर निगम ने बारिश और आपदा प्रबंधन के लिए ऑरेंज टीम गठित की थी। शनिवार शाम 4 बजे से कंट्रोल रूम पर शिकायतें आते ही टीमें वाहनों और मोटर पंप के साथ रवाना कर दी गईं। हालांकि गाड़ियों की मांग इतनी अधिक रही कि कई पार्षद लगातार अफसरों से अपने क्षेत्रों में गाड़ियां भेजने की गुहार लगाते रहे।
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यात्रियों से भरी बस गड्ढे में धंसी
रसोमा चौराहे पर बारिश के चलते बने गड्ढों और जलजमाव ने वाहन चालकों की मुश्किलें बढ़ा दीं। यहां वर्मा ट्रेवल्स की बस गड्ढे में धंस गई। बस में बैठे यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। बाद में चालक और परिचालक ने यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला।
यशवंत सागर का गेट खोला और बंद किया गया
लगातार बारिश से यशवंत सागर लबालब भर गया। शनिवार शाम 7 बजे एक गेट खोला गया और रात 8 बजे दूसरा गेट भी खोला गया। पानी निकासी के बाद इन्हें देर रात 3:30 बजे बंद कर दिया गया।
कॉलोनियों में जलभराव से लोगों की परेशानी
हवा बंगला, द्वारकापुरी, सांई बाबा नगर, विदुर नगर, प्रजापत नगर, गोंदवले धाम जैसे इलाकों में जलजमाव से लोग परेशान होते रहे। एरोड्रम क्षेत्र के राजनगर, कालानी नगर, व्यंकटेश विहार, अम्बिकापुरी और अशोक नगर जैसी कॉलोनियों में भी लोगों को आवागमन में भारी दिक्कतें झेलनी पड़ीं। कई लोगों ने वाहन दूर खड़े कर पैदल ही घर पहुंचने में भलाई समझी।
गड्ढे में बसा प्रजापत नगर
वार्ड 85 का प्रजापत नगर हर साल जलभराव से जूझता है। पार्षद राकेश जैन का कहना है कि यह क्षेत्र ढलान पर बसा है, जिस कारण आसपास के वार्डों का पानी यहां तेजी से आकर भर जाता है। चार साल से स्थिति जस की तस बनी हुई है और निगम का कोई स्थायी समाधान सामने नहीं आया है।