AI IMAGE- सरकारी मदद से वंचित एक अनाथ बालक।
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
लंबे समय से घोषित होने के बावजूद, अनाथ बच्चों को बाल आशीर्वाद योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा था। आखिरकार शासन ने हजारों बच्चों को चार करोड़ 48 लाख रुपए की राशि जारी की लेकिन इसमें भी 223 बच्चे मदद नहीं ले पाए। इस योजना के अंतर्गत हर माह चार हजार रुपए की राशि उन बच्चों को दी जाती है, जिन्होंने अपने पिता को खो दिया है। हालांकि, फंड की कमी के कारण यह राशि तीन से चार महीने तक रुकी रही थी, जिससे इन बच्चों को समय पर लाभ नहीं मिल सका। इंदौर जिले के 1173 बच्चों का नाम इस सूची में था, लेकिन 223 बच्चों के बैंक खातों का वेरिफिकेशन पूरा नहीं हो सका, जिसके कारण उन्हें यह राशि नहीं मिल पाई।
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डीबीटी वेरिफिकेशन में समस्याएं
महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित बाल आशीर्वाद योजना में कई बच्चों के खाते में भुगतान नहीं हो पा रहा था। पिछले चार महीने से अधिक समय तक कई बच्चों को उनके खाते में भुगतान नहीं हुआ था, लेकिन वित्तीय वर्ष की समाप्ति के बाद अब इस राशि का भुगतान किया गया। यह राशि 1173 बच्चों के लिए थी, लेकिन 223 बच्चों के खातों में वेरिफिकेशन में समस्याएं आईं, जिसके कारण उन्हें यह राशि नहीं मिल सकी। इन बच्चों के खातों की डीबीटी प्रक्रिया पूरी न होने के कारण उन्हें इस फंड का लाभ नहीं मिल पाया, और यह पैसा शासन को वापस लौटाना पड़ा।
छह महीने से अटकी हुई थी राशि
सरकार के नियमानुसार, यदि किसी विभाग को दी गई राशि वितरित नहीं होती है या निर्धारित योजनाओं में इस्तेमाल नहीं की जाती है, तो उसे वित्तीय वर्ष के अंत में शासन को वापस कर दिया जाता है। महिला एवं बाल विकास विभाग को लगभग एक करोड़ से अधिक की राशि शासन को लौटानी पड़ी, क्योंकि कई पालकों ने अपने बच्चों के खातों की डीबीटी प्रक्रिया पूरी नहीं कराई थी। विभाग ने सभी बच्चों की सूची तैयार कर भोपाल स्थित कार्यालय भेज दी लेकिन यह राशि छह महीने से अटकी हुई थी और मुश्किल से जारी की गई थी। अब इस राशि को दोबारा कब हस्तांतरित किया जाएगा, इस पर सवाल उठ रहे हैं।
बड़ा सवालः क्या फिर से मिल पाएगा फंड
चूंकि नए शैक्षिक सत्र की शुरुआत हो चुकी है, इस फंड से बच्चों को काफी मदद मिल सकती थी, लेकिन ईकेवाईसी पूरी न होने के कारण 223 बच्चे इस लाभ से वंचित रह गए। शासन की तरफ से जारी किए गए फंड की राशि बच्चों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती थी, विशेष रूप से उन बच्चों के लिए जिन्होंने अपने पिता को खो दिया है। हालांकि, अब तक यह प्रक्रिया अधूरी रह गई, और बच्चे इसका लाभ समय पर नहीं ले सके। अब देखने की बात यह होगी कि शासन इस राशि को कब दोबारा जारी करेगा और क्या इसके लिए कोई ठोस कदम उठाए जाएंगे।