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सादगी की मिसाल: इंदौर एयरपोर्ट पर अकेले दिखे नारायण मूर्ति, खुद उठाया बैग; यात्री से बोले कृपया जगह दें...

Wed, 14 Jan 2026 11:00 AM IST
अर्जुन रिछारिया अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर

सार

Indore News: इंफोसिस के सह-संस्थापक नारायण मूर्ति की सादगी ने इंदौर एयरपोर्ट पर यात्रियों को प्रभावित किया। फिनटेक उद्यमी आदित्य जोशी ने उनके साथ विमान में बिताए 10 मिनटों का अनुभव साझा किया। इस बीच और क्या-क्या हुआ सिलसिलेवार तरीके से बता रहे हैं। 
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मूर्ति के साथ जोशी ने फोटो साझा की। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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फिनटेक कंपनी के सह-संस्थापक आदित्य जोशी ने हाल ही में इंदौर एयरपोर्ट पर इंफोसिस के को-फाउंडर नारायण मूर्ति से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लिंक्डइन पर एक भावुक और प्रेरणादायक पोस्ट साझा की है। जोशी ने बताया कि अरबपति होने के बावजूद मूर्ति के व्यवहार में जो विनम्रता दिखी, वह अनुकरणीय है। उन्होंने मूर्ति को उनकी दौलत के बावजूद एक विनम्र इंसान बताया। लिंक्डइन पोस्ट में जोशी ने बताया कि वह मूर्ति के साथ उसी फ्लाइट में थे और एयरपोर्ट और प्लेन में उनके साथ करीब 10 मिनट बिताए। उन्होंने बताया कि मूर्ति के साथ कोई सिक्योरिटी गार्ड नहीं था, उन्होंने लाइन नहीं तोड़ी और उन्हें कोई खास ट्रीटमेंट नहीं मिला।
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जोशी ने अपनी पोस्ट में लिखा...
आज इंदौर एयरपोर्ट पर नारायण मूर्ति से मुलाकात हुई।
हम बेंगलुरु जाने वाली एक ही फ्लाइट में थे। वह बाकी सब लोगों की तरह चुपचाप बैठे थे, मैं उनके पास गया, सम्मान से उनके पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया और एक तस्वीर खींची।
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मैंने उनके साथ मुश्किल से 10 मिनट बिताए, लेकिन मुझे पता है कि मैं उन पलों को जिंदगी भर याद रखूंगा।
कोई लाइन नहीं तोड़ी।
कोई खास ट्रीटमेंट नहीं।
कोई साथ में लोग नहीं।
कोई खास सीट नहीं।
79 साल की उम्र में, उन्होंने खुद अपना बैग ओवरहेड बिन में रखा, दूसरी लाइन में बैठे, विनम्रता से एक साथी यात्री से थोड़ी जगह बनाने के लिए कहा, और अपने आस-पास सभी से गर्मजोशी से मिले।
वह रतलाम में एक उद्घाटन कार्यक्रम के लिए आए थे और फिर बेंगलुरु अपने घर जा रहे थे।
जब वह कहते हैं कि 70 घंटे काम करना चाहिए, तो उन्होंने यह करके दिखाया है।
लगभग 5 बिलियन डॉलर की नेट वर्थ के साथ, वह फ्लाइट में सबसे विनम्र व्यक्ति थे।
इंफोसिस और मूर्ति ने भारत और भारतीयों की पीढ़ियों के लिए जो किया है, वह किसी क्रांति से कम नहीं है।

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