किसानों की खेती की जमीन अधिग्रहित करने के विरोध में आज से इंदौर कलेक्टर कार्यालय का घेराव शुरू हो गया है। यहां बड़ी संख्या में किसान विरोध पर बैठे हैं और कई प्रमुख संगठनों का इन्हें समर्थन मिल रहा है। आउटर रिंग रोड के पूर्वी-पश्चिमी हिस्से के साथ ही कई अन्य परियोजनाओं के लिए सरकार किसानों की कृषि भूमि ले रही है। इसके खिलाफ पिछले एक साल से लगातार आंदोलन और विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में आज से शुरू हुए इस शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन में बड़ी संख्या में किसान शामिल हैं। इसके लिए किसानों ने गांव-गांव अभियान चलाया है।
सरकार कर रही मनमानी
किसानों का कहना है कि भूमि अधिग्रहण की मनमानी नीति के खिलाफ यह प्रदर्शन किए जा रहे हैं। सरकार द्वारा लगातार मांगों की लगातार अनदेखी की जा रही है इसी वजह से ग्रामीण किसान, मजदूर आंदोलन के लिए मजबूर हुए हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक और भारतीय किसान संघ के मालवा प्रांत संगठन मंत्री अतुल महेश्वरी, संभाग अध्यक्ष कृष्णपालसिंह राठौड़ महानगर अध्यक्ष दिलीप मुक्ति, जिलाध्यक्ष राजेंद्र पाटीदार के नेतृत्व में यह आंदोलन हो रहा है। राजनीति से ऊपर उठकर सारे किसान इस आंदोलन को अपना समर्थन दे रहे हैं।
किसान खाने का सामान और बिस्तर लेकर पहुंचे
आंदोलन के लिए किसान पूरी तैयारी से आए हैं। आंदोलन अनिश्चितकाल के लिए हुआ तो उसकी तैयारी के लिहाज से किसान खाने-पीने की सारी सामग्री और रात्रि विश्राम के लिए बिस्तर लेकर पहुंचे हैं। आज धरना और घेराव स्थल पर किसानों द्वारा दाल-बाटी पकाई जाएगी। किसानों का कहना है अन्नदाता किसान अफसर और शहर वासियों को खुले मन और बड़े दिल से खाना खिलाएंगे।
मोहन सरकार में बलराम के उपासकों पर अत्याचारः चौधरी
किसान नेता सिंगाराम चौधरी कहते हैं कैसी विडंबना है कृष्ण नामरूपी मुख्यमंत्री "मोहन" की सरकार में भगवान कृष्ण के बड़े भाई बलराम के पूजक किसानों को अत्याचार का शिकार होना पड़ रहा है। प्रधानमंत्री से लेकर नीति आयोग के पदाधिकारी तक खेती-किसान को राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ बताते हैं दूसरी ओर उन्हीं की सरकार दलित-आदिवासी सहित सभी किसानों, उपजाऊ भूमि और पर्यावरण का संरक्षण करने वाली ग्रामीण सनातनी संस्कृति को विकास के कुचक्र के नाम पर जमींदोज कर रही है। इसी का नतीजा है कि किसानों को उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ रहा है।
कई बार ज्ञापन दिए किसी ने नहीं सुना
किसान नेताओं का कहना है सरकार को मांगों से संबंधित ज्ञापन कई बार दिए जा चुके हैं, जिन्हें गंभीरता से नहीं लिया गया, इसलिए किसान लामबंद हुए हैं। काफी विचार के बाद कुछ दिन पहले भारतीय किसान संघ की उच्चस्तरीय बैठक में बड़े आंदोलन का फैसला लिया गया था। किसान संघ के कृष्णपालसिंह का कहना है भूमि अधिग्रहण पर सरकार की नीयत और नीति के खिलाफ किसान ताकत के साथ तब तक आंदोलन करेंगे, जब तक निर्णय नहीं होता। भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश सरकार की मातृ संस्था राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख संगठन भारतीय किसान संघ को अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा लेना पड़ रहा है।
संघ कार्यालय पर बनी रणनीति
आंदोलन की रूपरेखा और रणनीति के लिए किसान संघ के प्रदेश स्तर के बड़े अधिकारियों और प्रचारकों की एक बड़ी मैराथन बैठक कुछ दिनों पहले रामबाग स्थित संघ कार्यालय पर हुई थी। इसमें संघ के प्रदेश अध्यक्ष कमलसिंह आंजना व संगठन मंत्री अतुल महेश्वरी भी थे। आंदोलन में इंदौर, उज्जैन, देवास, धार, खरगोन, खंडवा आदि जिलों के दलित, आदिवासी और अन्य वर्गों के किसान मजदूर शामिल हैं। इधर पश्चिमी रिंग रोड के खिलाफ किसानों द्वारा जगह-जगह सरकारी अमले का विरोध किया जा रहा है। कलेक्टर के निर्देश पर सर्वे चल रहा है इसके खिलाफ एकजुट होकर सर्वे नहीं होने दे रहे हैं। किसानों और सरकार के बीच संघर्ष की स्थिति बढ़ती जा रही है।
हर तहसील पर जाकर आवाज उठाई
इससे पहले गांव-गांव में जनजागरण किया गया। संभाग या मालवा प्रांत में हर तहसील कार्यालय में सरकार के नाम ज्ञापन दिया गया। घेराव और धरना प्रदर्शन भी हुआ। जिला स्तर पर 27 फरवरी को कलेक्टर का घेराव धरना प्रदर्शन करने का निर्णय हुआ था। बावजूद सरकार ने किसान भाइयों की अनदेखी की। भारतीय किसान संघ के इस आंदोलन की जानकारी देते हुए किसान संघ के प्रचार-प्रसार प्रमुख राहल मालवीय ने बताया खेती-किसानी की राष्ट्र और समाज के साथ पर्यावरण संरक्षण में महत्व को केंद्र में रखते हुए उपजाऊ भूमि को बचाना राष्ट्र के विकास के लिए गंभीर चिंता का विषय है। राष्ट्रहित में किसान संघ की मांग है मध्यप्रदेश में भूमि अधिग्रहण कानून 2013 को उसके मूल स्वरूप में लागू किया जाए।
यह है किसानों की प्रमुख मांगें
• इंदौर में पूर्वी एवं पश्चिमी रिंग रोड का जॉइंट सर्वे तत्काल बंद हो।
• केंद्रीय भू-अधिग्रहण कानून 2014, राज्य में अतिशीघ्र लागू किया जाए।
• 12 वर्षों से गाइडलाइन बढ़ी है। प्रति वर्ष 20% के हिसाब से गाइडलाइन बढ़ाएं।
• बढ़ी गाइडलाइन का चार गुना मुआवजा दिया जाए।
• इंदौर में आउटर रिंग रोड के लिए जारी राजपत्र को निरस्त कर गाइडलाइन बढ़ाकर नया राजपत्र जारी किया जाए।
• किसानों की सहमति के बिना कोई अधिग्रहण प्रक्रिया आगे न बढ़ाई जाए।
• सभी विकास प्राधिकरणों को भंग किया जाए क्योंकि इनका गठन जिस उद्देश्य के लिए हुआ था, वे उससे भटक चुके हैं।