फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Indore News: ऑपरेशन सिंदूर जारी है, हम शांतिवादी नहीं, तीनों सेना प्रमुख ने बताई भविष्य की तैयारियां

Tue, 26 Aug 2025 08:55 PM IST
अर्जुन रिछारिया अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर

सार

Indore News: महू आर्मी वॉर कॉलेज में रण संवाद-2025 की शुरुआत सीडीएस अनिल चौहान ने की। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर से मिली सीख, युद्ध में तकनीक की अहमियत और संयुक्त प्रशिक्षण की जरूरत पर जोर दिया। शाम को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी बात रखेंगे।
विज्ञापन
1 of 2
सीडीएस अनिल चौहान ने संबोधित किया - फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार सेना का रण संवाद-2025 कार्यक्रम मंगलवार से महू स्थित आर्मी वॉर कॉलेज में शुरू हुआ। इस मौके पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर एक आधुनिक संघर्ष था, जिससे हमने कई महत्वपूर्ण सबक सीखे। इनमें से अधिकांश पर अमल चल रहा है और कुछ को लागू भी कर दिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऑपरेशन अब भी जारी है। कार्यक्रम में शामिल होने के लिए केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मंगलवार शाम को महू पहुंच गए हैं। 

देशसेवा का यह भी एक जज्बा...
Indore News: 52 बार रक्तदान कर बनीं मप्र की पहली महिला, जानिए तरनजीत की प्रेरक कहानी

गीता और महाभारत से युद्ध नीति की सीख
सीडीएस ने कहा कि गीता और महाभारत युद्ध नीति के सर्वश्रेष्ठ उदाहरण हैं। चाणक्य की नीति ने चंद्रगुप्त मौर्य को विजय दिलाई। कौटिल्य और चाणक्य ने शक्ति, उत्साह और युक्ति को युद्ध नीति का मूल तत्व बताया है। उन्होंने जोर दिया कि शस्त्र और शास्त्र दोनों का संतुलन आवश्यक है। सीडीएस ने कहा कि इस साल 15 अगस्त को लाल किले से PM नरेंद्र मोदी के सुदर्शन चक्र मिशन पर किए गए ऐलान पर काम शुरू हो चुका है। जनरल चौहान ने कहा कि रविवार को DRDO (डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन) द्वारा इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस वेपन सिस्टम (IADWS) का सफल परीक्षण इसी का हिस्सा है। CDS ने कहा कि वर्ष 2035 में मिशन पूरा होने के बाद यह भारत की सुरक्षा आयरन डोम (या फिर गोल्डन डोम) की तरह करेगा। CDS ने कहा कि भारत विकसित बनने की दिशा में अग्रसर है। ऐसे में भारत की सेनाएं भी दुनियाभर की एडवांस मिलिट्री की श्रेणी में शामिल होने के लिए प्रयासरत हैं।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

2 of 2
शाम को रक्षामंत्री राजनाथ सिंह महू के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पहुंचे - फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
“हम शांति चाहते हैं, पर शांतिवादी नहीं हो सकते”
सीडीएस चौहान ने कहा कि भारत हमेशा शांति का पक्षधर रहा है और यह एक शांतिप्रिय राष्ट्र है। लेकिन किसी भ्रम में न रहें, हम शांतिवादी नहीं हो सकते। उन्होंने उद्धरण देते हुए कहा – “यदि आप शांति चाहते हैं, तो युद्ध के लिए तैयार रहें।” CDS जनरल चौहान ने कहा कि शक्ति के बिना शांति एक 'यूटोपियन' धारणा है। जनरल चौहान ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की पंक्तियां दोहराते हुए कहा, ‘क्षमा शोभती उस भुजंग को जिसके पास गरल हो, उसको क्या जो दंतहीन, विषरहित, विनीत, सरल हो।’ उन्होंने ‘युद्ध पर प्रौद्योगिकी का प्रभाव’ विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि भविष्य के युद्धक्षेत्र किसी सीमा को नहीं पहचानेंगे। इसलिए सभी सेनाओं को मिलकर त्वरित और निर्णायक प्रतिक्रिया देने की जरूरत है। उन्होंने एआई, साइबर और क्वांटम तकनीक को संयुक्त प्रशिक्षण के साथ जोड़ने पर बल दिया और कहा कि संयुक्त कौशल ही भारत के सैन्य परिवर्तन की नींव है।

वाइस एडमिरल बोले – तकनीक बनी निर्णायक कारक
नौसेना के वाइस एडमिरल तरुण सोबती ने कहा कि ड्रोन, आईएसआर, साइबर ऑपरेशन और सूचना युद्ध जैसे साधन यूक्रेन और गाजा संघर्ष में निर्णायक कारक रहे हैं। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर में इस्तेमाल तकनीक को और अधिक एडवांस बनाने की जरूरत बताई।

वायुसेना अधिकारी ने बताई उभरती तकनीकों की अहमियत
भारतीय वायुसेना के प्रशिक्षण कमान के एओसी-इन-सी एयर मार्शल तेजिंदर सिंह ने ‘युद्ध को प्रभावित करने वाली उभरती प्रौद्योगिकियों की पहचान’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने खासतौर से एआई और मशीन लर्निंग, साइबर, क्वांटम, अंतरिक्ष एवं प्रति-अंतरिक्ष तकनीक, निर्देशित ऊर्जा हथियार (DEW) और हाइपरसोनिक तकनीक के महत्व पर प्रकाश डाला।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें