शाम को रक्षामंत्री राजनाथ सिंह महू के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पहुंचे
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“हम शांति चाहते हैं, पर शांतिवादी नहीं हो सकते”
सीडीएस चौहान ने कहा कि भारत हमेशा शांति का पक्षधर रहा है और यह एक शांतिप्रिय राष्ट्र है। लेकिन किसी भ्रम में न रहें, हम शांतिवादी नहीं हो सकते। उन्होंने उद्धरण देते हुए कहा – “यदि आप शांति चाहते हैं, तो युद्ध के लिए तैयार रहें।” CDS जनरल चौहान ने कहा कि शक्ति के बिना शांति एक 'यूटोपियन' धारणा है। जनरल चौहान ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की पंक्तियां दोहराते हुए कहा, ‘क्षमा शोभती उस भुजंग को जिसके पास गरल हो, उसको क्या जो दंतहीन, विषरहित, विनीत, सरल हो।’ उन्होंने ‘युद्ध पर प्रौद्योगिकी का प्रभाव’ विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि भविष्य के युद्धक्षेत्र किसी सीमा को नहीं पहचानेंगे। इसलिए सभी सेनाओं को मिलकर त्वरित और निर्णायक प्रतिक्रिया देने की जरूरत है। उन्होंने एआई, साइबर और क्वांटम तकनीक को संयुक्त प्रशिक्षण के साथ जोड़ने पर बल दिया और कहा कि संयुक्त कौशल ही भारत के सैन्य परिवर्तन की नींव है।
वाइस एडमिरल बोले – तकनीक बनी निर्णायक कारक
नौसेना के वाइस एडमिरल तरुण सोबती ने कहा कि ड्रोन, आईएसआर, साइबर ऑपरेशन और सूचना युद्ध जैसे साधन यूक्रेन और गाजा संघर्ष में निर्णायक कारक रहे हैं। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर में इस्तेमाल तकनीक को और अधिक एडवांस बनाने की जरूरत बताई।
वायुसेना अधिकारी ने बताई उभरती तकनीकों की अहमियत
भारतीय वायुसेना के प्रशिक्षण कमान के एओसी-इन-सी एयर मार्शल तेजिंदर सिंह ने ‘युद्ध को प्रभावित करने वाली उभरती प्रौद्योगिकियों की पहचान’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने खासतौर से एआई और मशीन लर्निंग, साइबर, क्वांटम, अंतरिक्ष एवं प्रति-अंतरिक्ष तकनीक, निर्देशित ऊर्जा हथियार (DEW) और हाइपरसोनिक तकनीक के महत्व पर प्रकाश डाला।