इंदौर में 15.50 लाख रुपये की कोकीन के साथ गिरफ्तार अफ्रीकन महिला (लिंडा) के मामले में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि महिला जिस पासपोर्ट के सहारे भारत में घूम रही थी, वह पूरी तरह जाली है। नारकोटिक्स विंग ने जब एविएशन विभाग से उसकी ट्रेवल हिस्ट्री खंगाली, तो कोई रिकॉर्ड ही नहीं मिला। अब पुलिस ड्रग्स के साथ-साथ फर्जी पासपोर्ट और ह्यूमन ट्रैफिकिंग के रैकेट की भी जांच कर रही है।
ट्रेवल हिस्ट्री गायब, पासपोर्ट नंबर भी फर्जी
नारकोटिक्स टीम को लिंडा के पास से जो पासपोर्ट मिला, वह देखने में हूबहू असली लगता था। लेकिन जब जांच की गई, तो पता चला कि उस पर दर्ज नंबर फर्जी है। उस पासपोर्ट पर किसी भी तरह की यात्रा का कोई रिकॉर्ड दर्ज नहीं है, जबकि लिंडा साल पहले अफ्रीका से मुंबई आई थी। यह खुलासा होते ही सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं, क्योंकि यह मामला अब सिर्फ ड्रग्स का नहीं, बल्कि अवैध घुसपैठ और जाली दस्तावेजों के बड़े सिंडिकेट का लग रहा है।
हवालात में टूटी चुप्पी, लोकल पेडलर फरार
गुरुवार को कोर्ट ने आरोपी लिंडा को जेल भेज दिया। पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तारी के बाद पहले दिन उसने पूछताछ में कोई सहयोग नहीं किया। लेकिन दूसरे दिन हवालात के बाहर उसने चुप्पी तोड़ी और इंदौर के उस युवक का नाम उगला जिसे वह ड्रग्स की डिलीवरी देने आई थी। हालांकि, लिंडा की गिरफ्तारी की खबर लगते ही वह स्थानीय तस्कर फरार हो गया है। पुलिस उसकी तलाश में जुटी है। महिला के पास से 31.85 ग्राम कोकीन बरामद हुई थी।
मोबाइल खोलेगा ड्रग सिंडिकेट के राज
जांच में पता चला है कि महिला मुंबई से बस द्वारा इंदौर आई थी। पुलिस को शक है कि वह पहले भी इसी तरह ड्रग्स की सप्लाई कर चुकी है। उसके मोबाइल को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। पुलिस को उम्मीद है कि कॉन्टैक्ट लिस्ट, व्हाट्सएप चैट और डिजिटल पेमेंट ट्रेल से मुंबई से इंदौर तक फैले ड्रग नेटवर्क के कई बड़े नाम सामने आएंगे।