कई जगह गाड़ियों पर भी पेड़ गिर गए
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
इंदौर में तीन दिन से शहरवासी जलजमाव, बिजली गुल, ट्रैफिक जाम से परेशान है। मानूसन के समय तेज हवा के साथ बारिश होना सामान्य बात है, लेकिन शहर की जिम्मेदारी उठाने वाले विभागों की लापरवाही के कारण इंदौर में हालात बिगड़े है।
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शहर में न तो स्टार्म वाटर लाइन, नालों की ठीक से सफाई हुई है और न ही बिजली कंपनी ने तारों पर झूलती टहनियों को हटाया। लाइनों के रख रखाव के बजाए सारा जोर बिजली बिल वसूली पर लगा रहा। लोग बिजली कंपनी से ज्यादा नाराज है, क्योकि गुल होने के बाद बिजली चार से छह घंटे में आ रही है। चार साल पहले आधे घंटे में फाॅल्ट खोजकर बिजली व्यवस्था बहाल हो जाती थी, लेकिन अब बिजली कंपनी के स्टाॅफ को फाल्ट खोजने में ही टाइम लग जाता है।
खतरनाक मकानों को सिर्फ नोटिस
इंदौर में 175 खतरनाक श्रेणी के मकान है। वर्षाकाल से पहले नगर निगम मकानों के खतरनाक हिस्सों को हटाता है,ताकि हादसा न हो सके। इंदौर में चार साल पहले एक खतरनाक होटल गिरने से दस लोगों की मौत हो गई थी। इस तरह के हादसों से भी नगर निगम ने सबक नहीं लिया है। इस साल खतरनाक मकानों को सिर्फ नोटिस दिया गया है। नगर निगम ने शहर के खतरनाक पेड़ों को भी नहीं हटाया है। जेल रोड, मल्हारअाश्रम, एरोड्रम रोड, पोलोग्राउंड सहित कई मार्गों पर पुराने और खतरनाक पेड़ है।
बढ़ गए जलजमाव वाले क्षेत्र
शहर में जलजमाव भी एक बड़ी समस्या बन चुका है,क्योकि पुरानी बसाहट वाले इलाकों की सड़कों पर स्टार्म वाटर लाइन नहीं है। पिछले साल शहर में जलजमाव के बाद नगर निगम ने 50 से ज्यादा क्षेत्र चिन्हित किए थे, लेकिन इस साल जिन मार्गों पर निर्माण कार्य हो रहा है। वहां जलजमाव ज्यादा नजर आया। निगमायुक्त शिवम वर्मा ने कहा कि तीन दिन में हुई बारिश में जलजमाव के जो नए इलाके सामने आए है। वहां भी हम जल निकासी की व्यवस्था करेंगे।