इंदौर में कम बारिश के कारण उत्पन्न जल संकट से निपटने के लिए नगर निगम ने हर वार्ड के कुएं-बावड़ियों पर हाइड्रेंट बनाने, नई जल नीति लागू करने और जनवरी से वॉशिंग सेंटर बंद करने जैसी व्यापक योजनाएं तैयार की हैं।
इंदौर में इस वर्ष कम बारिश होने के कारण जल संकट की स्थिति बनने लगी है। इस गंभीर समस्या को देखते हुए नगर निगम को अब पुराने परंपरागत जल स्त्रोतों की याद आई है। निगम प्रशासन ने यह महत्वपूर्ण फैसला लिया है कि शहर के प्रत्येक वार्ड में कम से कम एक कुएं या बावड़ी पर हाइड्रेंट बनाया जाएगा। इसी हाइड्रेंट के माध्यम से संबंधित वार्ड के समस्याग्रस्त इलाकों में पानी की सुचारू आपूर्ति की जाएगी।
विज्ञापन
जल संकट और मास्टर प्लान की तैयारी
इस साल सामान्य से कम वर्षा होने के कारण यह बात पूरी तरह स्पष्ट हो चुकी है कि जनवरी के महीने से ही शहरवासियों को पानी की भीषण किल्लत का सामना करना पड़ सकता है। इस संभावित स्थिति को ध्यान में रखते हुए नगर निगम ने अपनी ओर से अग्रिम तैयारियां आरंभ कर दी हैं। महापौर पुष्यमित्र भार्गव के अनुसार पानी को व्यर्थ बहने से बचाने और उसके सही उपयोग के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए एक बड़े स्तर पर जनजागरण अभियान चलाया जाएगा। इसके साथ ही प्रत्येक वार्ड के लिए एक विशेष वाटर मास्टर प्लान भी तैयार किया जाएगा।
समस्याग्रस्त क्षेत्रों की सूची और जल स्रोतों का सर्वे
मास्टर प्लान के अंतर्गत ऐसे सभी क्षेत्रों को चिन्हित कर उनकी सूची बनाई जाएगी जहां नर्मदा जलप्रदाय की मुख्य लाइनें उपलब्ध नहीं हैं और वहां के निवासी अपनी दैनिक जरूरतों के लिए पूरी तरह से बोरिंग पर आश्रित हैं। ऐसे इलाकों को सूचीबद्ध करने के उपरांत वहां की कुल जल आवश्यकता का सटीक आकलन किया जाएगा। महापौर ने स्पष्ट किया कि हर वार्ड में स्थित प्राकृतिक जल स्त्रोत जैसे कुएं और बावड़ी पर हाइड्रेंट निर्मित होंगे। इसके लिए नगर निगम के अधिकारियों को सर्वे कर उपयुक्त कुओं और बावड़ियों को चिन्हित करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
विज्ञापन
यशवंत सागर और उपचारित ड्रेनेज वाटर का उपयोग
राहत की बात यह है कि राज्य सरकार द्वारा यशवंत सागर तालाब के सूखने पर उसे नर्मदा शिप्रा लिंक योजना के जल से भरने की औपचारिक स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। इस निर्णय से यशवंत सागर तालाब के माध्यम से प्रतिदिन मिलने वाले 30 एमएलडी पानी को लेकर जो चिंता बनी हुई थी वह पूरी तरह समाप्त हो गई है। इसके अतिरिक्त नागरिकों तक ड्रेनेज के उपचारित पानी को आसानी से पहुंचाने के लिए विशेष रूप से अलग टैंकर लगाए जाएंगे। ये टैंकर निर्माण कार्यों वाली जगहों पर पानी की आपूर्ति करेंगे।
कड़े कदम और नई जल नीति का खाका
शहर में जल संरक्षण के लिए जनवरी के महीने से सभी वॉशिंग सेंटरों का संचालन बंद करने की योजना बनाई गई है। पूरे शहर के लिए एक विस्तृत और नई जल नीति तैयार की जा रही है, जिसे आगामी सप्ताह में होने वाली महापौर परिषद की बैठक के समक्ष पेश किया जाएगा। इस नई जल नीति के प्रावधानों के आधार पर ही कार्य करते हुए इस वर्ष शहर को संभावित जल संकट से उबारने का प्रयास किया जाएगा।