डेढ़ माह पहले हुकमचंद मिल का आयोजन हुआ, पैसा अब आया।
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33 साल बाद हुकमचंद मिल के श्रमिकों की आंखों में चमक नजर आ रही है। अब तक तो वे आंखे अपने हक का पैसा खाते में आने का इंतजार करती थी, लेकिन अब इंतजार खत्म हुआ। बुधवार को 242 श्रमिकों के खाते में 8.57 करोड़ रुपये आए,जबकि गुरुवार को 221 श्रमिकों के खाते में 7 करोड़ से ज्यादा की राशि जमा हुई। प्राथमिकता उन श्रमिकों को दी जा रही है, जो जीवित है।
उन्हें भुगतान के बाद मृत हो चुके श्रमिकों की पत्नी व अन्य परिजनों को राशि दी जाएगी। हुकमचंद मिल श्रमिक समिति के अध्यक्ष नरेंद्र श्रीवंश ने बताया कि समिति श्रमिकों के फार्म कोर्ट द्वारा गठित कमेटी के पास भेज रही है। जिसके सत्यापन के बाद राशि मजदूरों के खाते में जा रही है। फरवरी तक सभी 5 हजार श्रमिकों के खाते में पैसा पहुंच जाएगा।
डेढ़ महीने पहले की देरी
प्रदेश सरकार ने डेढ़ माह पहले एक आयोजन किया था। जिसमें मुख्यमंत्री मोहन यादव ने परिसमापक के खाते में राशि डाली थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कुछ श्रमिकों से वर्चुअली आयोजन में जुड़कर बातें की थी, लेकिन उसके बावजूद पैसा खातों में नहीं आ रहा था। इस बीच तीन श्रमिकों की मौत भी हो चुकी है। अब श्रमिकों के खाते में पैसा आ रहा है तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं है।
श्रमिकों के खातों में तीन से लेकर पांच लाख रुपये तक की राशि आ रही है। कोर्ट ने जो समिति बनाई है, उनमें परिसमापक, तहसीलदार के अलावा श्रमिकों की समिति के किशन लाल बोकरे को भी शामिल किया गया है।
इस समिति की अनुशंसा के बाद बैंक श्रमिकों के खातों में पैसा डाल रही है। उल्लेखनीय है कि 33 साल पहले हुकमचंद मिल अचानक बंद हो गई थी और पांच हजार से श्रमिक बेरोजगार हो गए थे। श्रमिकों ने हार नहीं मानी और 33 साल तक हाईकोर्ट में कानूनी लड़ाई लड़ी। अब फैसला श्रमिकों के पक्ष में आया है।