मप्र विधानसभा चुनाव 2023 में भाजपा को बहुमत मिला और इंदौर की सभी 9 सीटों पर भाजपा के उम्मीदवारों को जीत मिली। अब इन नए विधायकों के सामने भी कई चुनौतियां हैं। इस बार के चुनाव में सभी ने अपने अपने स्तर पर कई वादे किए। अब बारी है उन वादों और जनता की अपेक्षाओं पर खरे उतरने की।
बेहतर और निःशुल्क शिक्षा बड़ा मुद्दा
इंदौर में महंगे स्कूल और कालेज के बीच नागरिकों के लिए बच्चों को बेहतर शिक्षा देना एक चुनौती बनता जा रहा है। इस बार के चुनावों में बेहतर और निःशुल्क शिक्षा के लिए कई वादे किए गए हैं। इंदौर में सरकार ने सात सीएम राइज स्कूल तैयार करवाए हैं लेकिन जिले की आबादी और क्षेत्रफल के हिसाब से यह पर्याप्त नहीं है। कांग्रेस ने हर विधानसभा में एक नवोदय स्कूल देने का वादा किया था जबकि भाजपा ने कहा है कि वह सीएम राइज स्कूलों की संख्या में इजाफा करेगी। अब देखना यह है कि कौन सा विधायक अपने क्षेत्र में सीएम राइज स्कूलों की अधिक संख्या करवा पाता है।
सरकारी अस्पताल और संजीवनी क्लिनिक
इंदौर में सरकार ने बहुत पहले 29 संजीवनी क्लिनिक की घोषणा की थी लेकिन जमीन पर पांच भी नहीं उतर पाए हैं। नगर निगम पिछले लंबे समय से संजीवनी क्लिनिक शुरू करने की योजना बना रहा है, लेकिन किसी न किसी कारण के चलते यह योजना अधर में है। निगम इसके पीछे जमीन की अनुपलब्धता को बड़ा कारण बताता है। यह योजना कमलनाथ सरकार ने शुरू की थी लेकिन भाजपा सरकार ने इसे जारी रखा। अब देखना यह है कि संजीवनी क्लिनिक कब तक शुरू हो पाते हैं।
ट्रैफिक जाम सबसे बड़ी समस्या
इंदौर में ट्रैफिक जाम सबसे बड़ी समस्या बनकर उभरा है। राजबाड़ा, कलेक्टर कार्यालय, 56 दुकान, नंदा नगर, अन्नपूर्णा, विजय नगर समेत शहर में कई एेसे जोन हैं जहां लगातार ट्रैफिक जाम हो रहा है और प्रशासन पस्त नजर आ रहा है। ट्रैफिक जाम की वजह से न सिर्फ समय और पैसे का नुकसान हो रहा है बल्कि कई प्रमुख बाजारों में ग्राहकी भी घटी है।
प्रशासनिक व्यवस्थाओं को बेहतर बनाना
शहर में नगर निगम के जोन, पुलिस थाने, कलेक्टर कार्यालय समेत सभी सरकारी दफ्तरों में आम नागरिकों के कार्यों को आसान बनाना होगा। कांग्रेस ने इस बार चुनाव में सरकारी दफ्तरों में भ्रष्टाचार और लेटलतीफी के मद्दे को लगातार उठाया। अब भाजपा नेताओं के सामने इन व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने की चुनौती है।