विधायक रमेश मेंदोला ने भी परिजनों से मुलाकात की
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
बेटा और पत्नी सुरक्षित, परिवार का मूल निवास जोबट
घटना के दौरान सुशील का बेटा आस्टन और पत्नी जेनिफर किसी तरह सुरक्षित बच निकले। परिवार मूल रूप से मध्य प्रदेश के जोबट का रहने वाला है। पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, हमले के बाद सेना और पुलिस की मदद से जेनिफर और आकांक्षा को अस्पताल पहुंचाया गया, जबकि आस्टन पूरी तरह सुरक्षित हैं। इस हृदयविदारक घटना ने परिवार को झकझोर कर रख दिया है और पूरे इलाके में शोक की लहर है।
जेनिफर और आकांक्षा अस्पताल में भर्ती, पुलिस कर रही समन्वय
सेना द्वारा इंदौर पुलिस को भेजी गई मृतकों और घायलों की सूची के आधार पर एडिशनल पुलिस कमिश्नर अमित सिंह ने जानकारी दी कि आकांक्षा को पैर में गोली लगी है और जेनिफर हमले से बचने के दौरान गिरकर घायल हुई हैं। दोनों को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। प्रशासन पीड़ित परिवार से लगातार संपर्क में है और हर संभव मदद की जा रही है।
धारा 370 हटने पर कश्मीर जाने का प्लान बनाया, पता नहीं था हालात इतने खराब हैं
मृतक सुशील के मामा के बेटे संजय कुमरावत अपने जज्बातों पर काबू नहीं रख सके और फूट-फूटकर रोने लगे। उन्होंने कहा, "मेरा दोस्त जैसा भाई चला गया। भैया-भाभी और उनके दोनों बच्चे जम्मू-कश्मीर घूमने गए थे, इसकी जानकारी घरवालों को नहीं थी। सोमवार रात करीब 8 से 9 बजे के बीच एक दिल दहला देने वाली खबर मिली जब भतीजे ऑस्टिन का फोन आया। वह बेहद परेशान था, रो-रोकर कुछ बोल नहीं पा रहा था। दो बार फोन कट गया, लेकिन तीसरी बार जब उसने बात की तो बताया कि उसके पिता सुशील नथेनियल को आतंकवादियों ने गोली मार दी है। बहन आकांक्षा के पैर में भी गोली लगी है और मां-बेटा किसी तरह बच पाए हैं। यह सुनते ही पूरे परिवार के होश उड़ गए। उसे सरप्राइज देने की आदत थी, इसलिए उसने इस टूर के बारे में किसी को नहीं बताया। वह हमें लौटकर सरप्राइज देना चाहता था, लेकिन इस बार उसने समय गलत चुन लिया।" संजय ने आगे कहा कि 370 हटने के बाद से ही कश्मीर जाने की बात चल रही थी, लेकिन मौजूदा हालात अनुकूल नहीं थे। यदि सुशील ने पहले बताया होता तो वे उसे जाने नहीं देते।
ईसाई धर्म बताया तो तुरंत गोली मार दी
सुशील के छोटे भाई की पत्नी जैमा विकास ने बताया कि पूरा परिवार एक साथ कुछ समय बिताने के लिए कश्मीर गया था। हादसे के बाद बेटे ऑस्टिन ने फोन कर बताया कि आतंकियों ने सुशील से पूछा कि वह किस धर्म का है। जब परिवार चुप रहा तो आतंकी ने कहा- "कलमा पढ़ सकते हो?" सुशील ने परिवार को वहां से जाने के लिए कहा और फिर आतंकी ने उसे घुटनों पर बैठने को कहा। लेकिन जब वह मुस्लिमों की तरह नहीं बैठ सका, तो आतंकियों ने फिर पूछा कि वह किस धर्म का है। जैसे ही सुशील ने ‘ईसाई’ कहा, उसे गोली मार दी गई। इस हमले में आकांक्षा के पैर में भी गोली लगी और फायरिंग के बाद आतंकी फरार हो गए।
मुख्यमंत्री बोले सरकार जवाब देगी
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने पहलगाम आतंकवादी हमले पर कहा, "(आतंकी हमले में) एक इंदौर निवासी की दुखद मृत्यु हुई है। मैं बाबा महाकाल से कामना करता हूं कि उन्हें अपने चरणों में स्थान दें। यह पाकिस्तान की कायराना हरकत है... पाकिस्तान और उसके पिछलग्गुओं की इस कायराना हरकत का जवाब देने के लिए पूरा देश एकजुट है और हमारी सरकार भी बहुत अच्छे से प्लानिंग करके आगे बढ़ रही है... हम सब बाबा महाकाल से कामना करेंगे की आने वाले समय में ऐसी कोई कायराना हरकत ना हो..."