खाली कुर्सी देखकर मन भारी हो रहा था
कैलाश चंद्र जोशी को पास सहकारी निर्माण संस्था की फाइलें रहती थीं। वे भू अर्जन का काम भी देखते थे। दफ्तर में रोज उसके पास बैठने वाले कैलाशचंद्र दवे कहते हैं कि काम में मजा नहीं आ रहा है। वो मेरे ठीक पीछे बैठते थे। उनकी कुर्सी खाली थी। बार-बार नजर उस पर जा रही थी। कुछ देर के लिए मुझे कुर्सी हटाना पड़ी। सहकर्मी डाॅली साधे बताती है कि कैलाश ने कभी तनाव लेकर काम नहीं किया। वे हमेशा हंसते रहते थे। मजाक कर हमारा मन भी हलका कर लेते थे।
पत्नी की बीमारी के कारण कई बार दफ्तर देर से आते थे, लेकिन उस दिन शाम को देर तक दफ्तर में रहकर काम करते थे। प्यून राजेश कनेरिया ने बताया कि मंगलवार को कैलाश जी को मैंने चाय बनाकर पिलाई थी। उसके बाद वे अपने सहकर्मी पंकज के पास बैठे। पंकज ने बताया कि उन्होंने कुछ फाइलें निपटाई। फिर मुझसे कहा कि बचा काम बुधवार को करेंगे, लेकिन वे अब नहीं लौटेंगे। आईडीए के इंजीनियर कपिल देव भल्ला ने बताया कि उनकी कोई संतान नहीं थी। मुखाग्नि भी भतीजे ने दी। उनके परिवार को विभाग की तरफ से सवा लाख रुपये की आर्थिक सहायता मिलेगी।