इंदौर आईआईटी पास आऊट छात्रों के स्टार्टअप स्वाह ने त्रिची के एयरपोर्ट को नो लैंडफील एयरपोर्ट बनाया है। परिसर में ही लगे प्लांट मेें कचरा रिसायकल होता है। गीले कचरे से खाद भी बनाई जा रही है। पहले एयरपोर्ट प्रबंधन को कचरे के निपटान के लिए नगर निगम पर निर्भर रहना पड़ता है, लेकिन अब कचरा परिसर से बाहर नहीं जाता है। एयरपोर्ट पर प्रतिदिन 800 से एक हजार किलो कचरा निकलता है।
इंदौर के स्टार्टअप ने त्रिची अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे में डेढ़ करोड़ के इन हाउस ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (एसडब्ल्यूएम) रिसायकल प्लांट की शुरुआत की। हवाई अड्डे द्वारा उत्पन्न कचरे को इकट्ठा करने, अलग करने और रिसायकल करने की प्रोसेस रिसायकल प्लांट में हो रही है।
स्टार्टअप के फाउंडर समीर शर्मा ने बताया कि नए संयंत्र के साथ हवाई अड्डा सस्टेनेबिलिटी के नए पायदान पर आ गया है और नो लैंडफिल एअरपोर्ट बन गया है |
नया प्लांट नए टर्मिनल बिल्डिंग (एनआईटीबी) के डिपार्चर फ्लाईओवर के पास 300 वर्गमीटर भूमि पर बनाया गया है।स्वाहा द्वारा विकसित संयंत्र, बिना दुर्गंध उत्पन्न किए कुछ ही हफ्तों में कचरे को खाद में बदल देगा। पोषक तत्वों से भरपूर खाद प्रबंधन को सौंप दी जाएगी।
हवाई अड्डे के निदेशक जी. गोपालकृष्णन ने कहा वर्तमान में, पूरे हवाई अड्डे, जिसमें कैफेटेरिया भी शामिल है, प्रतिदिन 500 से 1000 किलो कचरा उत्पन्न होता है। यह संयंत्र प्रतिदिन एक से दो टन कचरा संभाल सकता है। प्लास्टिक व अन्य ठोस कचरा स्क्रैप बनाकर बेचा भी जा रहा है।