बदलते मौसम का प्रभाव स्वास्थ्य पर गहरा पड़ रहा है। ठंड के विदा लेने और गर्मी की शुरुआत होने से सर्दी-जुकाम, बुखार, वायरल संक्रमण के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। अस्पतालों और क्लीनिकों में मरीजों की भीड़ देखी जा रही है। डेंगू और मलेरिया के मामले भी सामने आ रहे हैं, जिससे स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। पिछले वर्ष मलेरिया के केवल 7 मामले आधिकारिक रूप से दर्ज किए गए थे, लेकिन डेंगू के 500 से अधिक मरीज सामने आए थे। इस बार भी गर्मी के साथ मच्छरों का प्रकोप बढ़ने लगा है, जिससे डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों की आशंका बढ़ गई है। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सर्वे और दवाइयों के छिड़काव का कार्य शुरू कर दिया है।
इसके अलावा, बच्चों में कुपोषण और एनीमिया की समस्या भी गंभीर बनी हुई है। प्रदेश में 72 प्रतिशत से अधिक बच्चे खून की कमी यानी एनीमिया से ग्रस्त पाए गए हैं। इंदौर जिले में भी इस समस्या को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने दस्तक अभियान के दूसरे चरण की शुरुआत कर दी है। इस अभियान के तहत 9 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों को विटामिन-ए और आवश्यक औषधियां दी जा रही हैं, ताकि उन्हें पोषण संबंधी कमी से बचाया जा सके। पहले चरण की रिपोर्ट के अनुसार, 54 प्रतिशत बच्चे एनीमिया से पीड़ित हैं, जिनमें से 0.4 प्रतिशत बच्चों में यह समस्या गंभीर स्तर पर है।
अंधत्व जैसी समस्याएं भी आ रहीं सामने
एनीमिया के कारण बच्चों में चिड़चिड़ापन, भूख न लगना, जल्दी थकान महसूस होना, सांस फूलना, बार-बार सर्दी-खांसी, उल्टी-दस्त जैसी समस्याएं होती हैं। इसके अलावा, आयु के अनुसार शारीरिक और मानसिक विकास में बाधा आती है और शरीर में सूजन भी देखी जा सकती है। 9 माह से 5 साल तक के सभी बच्चों को उनकी उम्र के अनुसार विटामिन-ए अनुपूरण दिया जाएगा। आहार के माध्यम से प्रतिदिन आवश्यक विटामिन-ए की मात्रा का केवल 50 प्रतिशत ही प्राप्त हो पाता है, जिससे इसकी कमी के कारण दस्त, खसरा, रतौंधी, कार्निया का नष्ट होना और अंधत्व जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं।
संक्रमण का खतरा भी बढ़ रहा
विटामिन-ए की कमी से रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कमजोर हो जाती है, जिससे बच्चों में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही, संक्रमणजनित एनीमिया के मामलों में वृद्धि होती है, जिससे बच्चों का समुचित विकास बाधित होता है। इसी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने दस्तक अभियान शुरू किया है, ताकि बच्चों को सही समय पर आवश्यक पोषण और दवाइयां मिल सकें और उनकी सेहत में सुधार हो सके।