यूरेशियन समूह की पांच दिनी बैठक शुक्रवार को संपन्न हुई। बैठक में आए सुझावों व निष्कर्षों का पालन समूह के सदस्य देश करेंगे। बैठक में भारत के प्रतिनिधियों ने आतंकवाद के लिए सीमा पार से होने वाली फंडिंग का मुद्दा उठाया। बैठक में कहा गया कि अल-कायदा, लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठन देश में सक्रिय हैं और उनसे जुड़े आतंकवादियों को दूसरे देशों से फंडिंग होती है। फंडिंग के कई सबूत भारत के पास हैं। यूरेशियन समूह के सदस्य देशों ने भरोसा दिलाया कि मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के लिए होने वाली फंडिंग पर सभी देश एक-दूसरे की मदद करेंगे।
यूरेशियन समूह की 41वीं बैठक, रोसफिन मॉनीटरिंग के निदेशक यूरी चिखानचिन की अध्यक्षता में हुई। बैठक में मूल्यांकन रिपोर्ट की समीक्षा की गई और उसे मंजूरी दी गई। भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव विवेक अग्रवाल ने बताया कि आपसी सहयोग भी सदस्य देशों को दिया जाएगा। ईरान को एफएटीएफ की ब्लैक लिस्ट में शामिल है। इससे निकलने के लिए भारत ईरान को तकनीकी सहयोग देगा।
मनी लॉन्ड्रिंग व टेरर फंडिंग की समीक्षा
उन्होंने बताया कि बैठक में इस वर्ष मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण के मामलों की समीक्षा की गई। सदस्य देशों को बताया गया कि क्रिप्टो करेंसी और फर्जी नामों से अकाउंट खोलकर आतंकी फंडिंग की जा रही है। टेरर फंडिंग में अक्सर विदेशी सहित क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंजर्स और क्रिप्टो वॉलेट शामिल होते हैं, जो मुख्य रूप से प्रॉक्सी के नाम पर खोले जाते हैं। उनकी जांच के लिए सामूहिक रूप से निगरानी जरूरी है।
ईएजी सदस्य देश पुरस्कृत
पूर्ण बैठक के दौरान सर्वश्रेष्ठ वित्तीय विश्लेषण के लिए ईएजी सदस्य देशों के वित्तीय संस्थानों के बीच प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए गए। विजेता कजाकिस्तान का एक प्रतिनिधि था। इसके अलावा तुर्कमेनिस्तान और ताजिकिस्तान के प्रतिनिधियों को भी पुरस्कार दिए गए। सप्ताह के दौरान एक औपचारिक समारोह भी आयोजित किया गया था। यूरेशिया समूह की 42 वीं बैठक मास्को में अगले साल 26 से 30 मई को होगी।