हुकमचंद मिल की झांकी को पहला पुरस्कार।
- फोटो : अमर उजाला
सुबह तक झांकियां लौटने के बाद निर्णायक कमेटी ने झांकियों को लेकर निर्णय सुनाया। पहले स्थान पर हुकमचंद मिल की नरकासुर की झांकी रही, जबकि दूसरे क्रम संयुक्त रुप से राजकुमार मिल की लंका दहन झांकी और मालवा मिल की भगत के वश में भगवान विषय पर बनी झांकी को मिला। राजकुमार मिल की झांकी सबसे देरी से सुबह सात बजे निर्णायक मंच के सामने आई थी, लेकिन पुरस्कार पा गई।
रात को राजकुमार मिल की झांकी की बिजली भी बार-बार बंद हो रही थी और ट्राला भी खराब होने के कारण उसे देर लगी। तीसरे क्रम पर आपरेशन सिंदूर पर बनी कल्याण मिल की झांकी को पुस्कार मिला। विशेष पुरस्कार स्वदेशी मिल व होप मिल की झांकी को मिला है।
नगर निगम व इंदौर विकास प्राधिकरण की झांकियां पुरस्कार की श्रेणी से बाहर रही। इस बार अखाड़ों के साथ भी कुछ झांकियां नजर आई। कछुए की झांकी को काफी लोगों ने सराहा। झांकी निर्माण करने वाले श्रमिकों को इस बार सबसे बड़ी चिंता बारिश की थी,क्योकि बारिश होने पर झांकियां खराब हो जाती है, लेकिन शनिवार रात बारिश नहीं हुई।
शहर के बैंड भी हुए शामिल
इस बार चल समारोह में झांकियां और अखाड़ों के अलावा शहर के कई बड़े बैंड भी शामिल हुए। बैंड मास्टरों ने भी आग्रह किया है कि अच्छे बैंडों को भी उनकी प्रस्तुति के आधार पर पुरस्कार दिया जाना चाहिए।