इंदौर को प्रवासी भारतीय सम्मेलन
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17 वें भारतीय प्रवासी सम्मेलन की मेजबानी का मौका इस बार इंदौर को मिला है, लेकिन यह बहुत कम लोगों को पता होगा कि इंदौर 21 साल पहले ही शहर के प्रवासी भारतीयों का सम्मेलन कर चुका है। उसके बाद केंद्र ने भी प्रवासी दिवस मनाने की तैयारी की थी। खास बात यह है कि अभी जो प्रवासी भारतीय सम्मेलन में शामिल होने आए है, वे तब भी इंदौर आए थे और इंदौर में निवेश को लेकर चर्चा की गई थी।
विजयवर्गीय ने की थी शुरुआत वर्ष2000 में कैलाश विजयवर्गीय इंदौर नगर निगम के मेयर बने थे। तब गांधी हॉल, राजवाड़ा के कायाकल्प की तैयारी की जा रही थी। विजयवर्गीय ने दूसरे देशों में रहने वाले इंदौर के लोगों से मदद मांगने का फैसला लिया था और इंदौर गौरव यात्रा निकालने का फैसला लिया गया।
तब नगर निगम ने बड़े पैमाने पर इसकी तैयारियां शुरू की और २० से ज्यादा प्रवासी भारतीय तब इंदौर आए थे।गौरव यात्रा भी निकली थीराजवाड़ा से गांधी हॉल तक प्रवासी भारतीयों को सम्मान के साथ लाया गया था। विटेंज कार, बग्घी पर सवार होकर मेहमान चले थे और इंदौरवासियों ने सड़क किनारे खड़े रहकर मेहमानों का अभिवादन किया था। न्यूयॉर्क में रहने वाले प्रवासी भारतीय जितेंद्र मुछाल बताते है कि तब मैं उस यात्रा का भी हिस्सा था। इंदौर गौरव फाउंडेशन का भी निर्माण तब किया गया था और राजवाड़ा के एक हिस्से का निर्माण फाउंडेशन के द्वारा कराया गया था। मेयर भार्र्गव को भी मिली थी जिम्मेदारीशहर के मेयर पुष्यमित्र भार्गव भी 21 साल पहले इंदौर के प्रवासी भारतीय सम्मेलन के आयोजन से जुड़े थे।
उन्होंने हाल ही में उसका जिक्र एक कार्यक्रम में किया था और बताया कि डेढ़ साल बाद अटलजी की सरकार ने महात्मा गांधी के साउथ अफ्रीका से देश लौटने की तिथि पर प्रवासी भारतीय दिवस मनाने का फैसला लिया। प्रवासी सम्मेलन इंदौर से पहले प्रवासी भारतीय सम्मेलन दिल्ली, कोच्चि, गांधी नगर, बेंगलुरु, वाराणसी सहित अन्य शहरों में मनाया गया था।