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इंदौर में भड़कीं छात्राएं: बोलीं- नेता अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में क्यों नहीं पढ़ाते?

Sat, 19 Sep 2026 09:14 PM IST
Arjun Richhariya न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

इंदौर में आयोजित कार्यक्रम में छात्राओं ने महिला सुरक्षा, महंगे शिक्षा तंत्र और घोटालों पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि कोचिंग माफिया हावी हैं और कानून सभी के लिए समान रूप से लागू नहीं हो रहे हैं, जिससे सुधार में बाधा आ रही है।
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INDORE NEWS - फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
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विस्तार
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इंदौर में आयोजित कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के कार्यक्रम छात्रों की गूंज में हजारों छात्राओं ने शिरकत की। यहां पर छात्राओं ने महिला सुरक्षा, भ्रष्टाचार और नेताओं के अपराधों पर खुलकर बात की। छात्राओं ने कहा कि जब तक कानून सभी के लिए समान नहीं होंगे सुधार नहीं होगा। नेता और अधिकारी अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में नहीं पढ़ाएंगे तो वहां की व्यवस्थाएं नहीं सुधरेंगी। 
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सरकार ने शिक्षा को व्यापार बना दिया
जूही सोनी ने कहा कि आप देश में कहीं भी जाएं युवा नौकरियों और शिक्षा की अव्यवस्थाओं को लेकर परेशान हैं। एजुकेशन इतना महंगा हो गया कि सामान्य स्तर के माता पिता अपने बच्चों को ठीक से पढ़ा भी नहीं सकते। शिक्षा को व्यापार बना दिया गया है। आज कोचिंग माफिया सरकारों को चला रहे हैं। हर जगह पेपर लीक हो रहे हैं और कोचिंग लाखों रुपए फीस ले रहे हैं। सामान्य आर्थिक स्तर वाले माता पिता कर्ज लेकर भी अपने बच्चों को शिक्षित नहीं कर सकते। विदेशों में छात्रों को निःशुल्क शिक्षा दी जाती है हमारे यहां पर शिक्षा एक व्यापार बन गया है। 

नेता और अधिकारी अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में क्यों नहीं पढ़ाते
पूर्णिमा मौर्य ने कहा कि शिक्षा और रोजगार का मुद्दा लगातार उठने के बाद भी रिजल्ट क्या आ रहा है। यदि नेता और सरकार गंभीर होते तो तुरंत परिणाम दिखते। सरकारी स्कूलों की हालत देखिए। कलेक्टर, नेता अपने बच्चों को बड़े स्कूलों में पढ़ाते हैं वे खुद अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में क्यों नहीं भेजते। जब तक नेता और अधिकारी जनता से नहीं जुड़ेंगे तब तक सुधार नहीं होगा। नेताओं के बच्चे विदेश में पढ़ते हैं और वे हमें रैलियों में जाने के लिए प्रेरित करते हैं। नेताओं के बच्चे सड़क पर रैलियों में भाग नहीं लेते। आज हम आंदोलन को मजबूर हुए हैं क्योंकि कई साल तक शिक्षा और रोजगार के मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया गया। 
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महिला सुरक्षा पर कानून बहुत हैं पर दबंगों में डर क्यों नहीं दिखता
रागिनी ने कहा कि महिला सुरक्षा को लेकर बातें खूब होती हैं लेकिन जमीन पर हकीकत कुछ और है। आज शिक्षा और रोजगार बड़ा मुद्दा बन गया है क्योंकि इस पर कई साल तक ध्यान नहीं दिया गया। दुनियाभर के देश अपने छात्रों को बेहतर शिक्षा दे रहे हैं ताकि वे अपने देश का भविष्य बना सकें। हमारे देश में सरकार शिक्षा पर ही ध्यान नहीं दे रही। यदि युवाओं को बेहतर शिक्षा नहीं मिलेगी तो वे देश के विकास के लिए कैसे काम कर पाएंगे। इसके साथ दूसरा बड़ा मुद्दा महिला सुरक्षा का भी है। कई कानून बने हैं और तमाम दावे किए जाते हैं लेकिन फिर भी महिला सुरक्षा की जमीनी हकीकत कुछ और ही है। रागिनी ने कहा कि आज भी गांवों में महिलाएं डरकर रहती हैं। दबंगों, नेताओं और आपराधिक पृष्ठभूमि के लोगों के लिए आज भी कानून उस तरह से नजर नहीं आते जैसे आम इंसान के लिए। आम इंसान हेलमेट नहीं लगाता तो तुरंत चालान काट दिया जाता है लेकिन पुलिसवाला या नेता हेलमेट नहीं लगाता तो उसका चालान नहीं कटता है। अगर नियम बने हैं तो सभी के लिए एक जैसे क्यों नहीं हैं। 
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