रुचि ग्लोबल लिमिटेड, जिसे अब एग्रोट्रेड एंटरप्राइजेज लिमिटेड के नाम से जाना जाता है, उससे जुड़े लगभग 66 करोड़ रुपये के बैंक ऋण घोटाले के मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने चालान दाखिल कर दिया है। 1 अक्टूबर को विशेष पीएमएलए कोर्ट, इंदौर में यह चालान दाखिल किया गया। अदालत ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए इसमें शामिल 21 आरोपियों और संबंधित संस्थाओं को नोटिस जारी कर प्री-कॉग्निजेंस सुनवाई के लिए पेश होने का आदेश दिया है।
सीबीआई की प्राथमिकी के बाद ईडी ने शुरू की जांच
इस पूरे प्रकरण की शुरुआत सीबीआई भोपाल द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी से हुई थी, जिसके आधार पर ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत अपनी जांच आरंभ की। सीबीआई की मूल प्राथमिकी में रुचि ग्लोबल लिमिटेड के साथ-साथ उमेश शाहरा, साकेत बरोडिया, आशुतोष मिश्रा और कुछ अज्ञात लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया था।
कृषि उत्पाद खरीद के बहाने हासिल की गई साख सुविधाएं
ईडी की जांच में यह बात सामने आई है कि रुचि ग्लोबल ने पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा और जम्मू-कश्मीर बैंक के कंसोर्टियम से करीब 66 करोड़ रुपये की नॉन-फंड बेस्ड क्रेडिट सुविधाएं प्राप्त की थीं। इनमें मुख्य रूप से लेटर ऑफ क्रेडिट यानी एलसी शामिल थे। जांच एजेंसी का आरोप है कि अपनी सहयोगी संस्थाओं के पक्ष में कृषि उत्पादों की खरीद-फरोख्त का बहाना बनाकर इन साख सुविधाओं का व्यावसायिक इस्तेमाल किया गया।
फर्जी दस्तावेजों के जरिए रकम घुमाकर वापस कंपनी के खातों में पहुंचाई
प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार एलसी के माध्यम से तैयार किए गए बिलों में कथित तौर पर फर्जी बिल ऑफ एक्सचेंज और नकली लॉरी रिसीट का सहारा लिया गया। बैंकों से बिल डिस्काउंट कराने के बाद मिली राशि को कई संबंधित संस्थाओं के बैंक खातों के जरिए घुमाया गया और महज 1 से 3 दिनों के भीतर वह राशि फिर से रुचि ग्लोबल के खातों में ट्रांसफर कर दी गई। एजेंसी ने इसे बैंक क्रेडिट के आपराधिक दुरुपयोग और रकम को लेयरिंग कर वापस कंपनी तक पहुंचाने की सोची-समझी साजिश बताया है।
छापेमारी में बेहिसाब नकदी जब्त और करोड़ों की संपत्तियां कुर्क
प्रवर्तन निदेशालय ने 23 दिसंबर 2025 को पीएमएलए की धारा 17 के तहत तलाशी अभियान चलाया था। इस कार्रवाई के दौरान 23.50 लाख रुपये की बेहिसाब नकदी जब्त की गई थी और कई संदिग्ध बैंक खातों को फ्रीज किया गया था। इसके पश्चात फरवरी 2026 में ईडी ने 5.13 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति को प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर के तहत कुर्क कर लिया था।
मुख्य आरोपी की पत्नी के नाम दर्ज जमीन भी हुई कुर्क
ईडी के ब्योरे के मुताबिक 5.13 करोड़ रुपये की कुर्क की गई संपत्तियों में रुचि ग्लोबल से जुड़े उमेश शाहरा की पत्नी नीता शाहरा के नाम पर पंजीकृत जमीन भी शामिल है। एजेंसी का दावा है कि बैंक से धोखे से प्राप्त की गई रकम का उपयोग निजी अचल संपत्तियां खरीदने में किया गया था।
बैंक समूह ने जताया था 188 करोड़ से अधिक के नुकसान का अंदेशा
सीबीआई की प्राथमिकी में बैंक समूह की शिकायत के आधार पर कुल 188.35 करोड़ रुपये के वित्तीय नुकसान का आरोप लगाया गया था। हालांकि, ईडी की मौजूदा जांच मुख्य रूप से करीब 66 करोड़ रुपये की नॉन-फंड बेस्ड क्रेडिट सुविधाओं के दुरुपयोग पर केंद्रित है। इस बैंक कंसोर्टियम में बैंक ऑफ बड़ौदा, पंजाब नेशनल बैंक और जम्मू-कश्मीर बैंक शामिल हैं। अदालत द्वारा 21 आरोपियों को नोटिस जारी किए जाने के बाद ईडी ने स्पष्ट किया है कि मामले में आगे की विस्तृत जांच जारी है और पैसों के लेन-देन की अंतिम कड़ियों की पड़ताल की जा रही है।