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Indore News: भागीरथपुरा में हैजा का अलर्ट, डॉ. एके द्विवेदी ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र; मदद की मांग की

Sun, 04 Jan 2026 07:17 PM IST
तरुणेंद्र चतुर्वेदी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित जलापूर्ति से हैजा के संभावित खतरे को लेकर जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. एके द्विवेदी ने प्रशासन को आगाह किया है। उन्होंने कलेक्टर, संभागायुक्त और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर समय रहते प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।
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जलजनित बीमारी के संभावित प्रकोप को लेकर चिंता। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इंदौर भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित जलापूर्ति के कारण हैजा (कॉलरा) जैसी गंभीर जलजनित बीमारी के संभावित प्रकोप को लेकर चिंता बढ़ गई है। वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक एवं जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. एके द्विवेदी ने इस संबंध में प्रशासन को सतर्क करते हुए जिला कलेक्टर, इंदौर संभागायुक्त और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र भेजकर स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया है।

डॉ. द्विवेदी ने पत्र में उल्लेख किया है कि भगीरथपुरा क्षेत्र में लंबे समय से दूषित जलापूर्ति की शिकायतें सामने आ रही हैं, जिससे हैजा सहित अन्य जलजनित रोगों के फैलने का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने चेताया है कि यदि समय रहते जल शुद्धिकरण, स्वच्छता नियंत्रण और चिकित्सकीय रोकथाम के ठोस उपाय नहीं किए गए, तो स्थिति गंभीर जनस्वास्थ्य संकट का रूप ले सकती है।

'आपात परिस्थितियों में सहायक सिद्ध हो सकती हैं ये दवाएं'

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पत्र में उन्होंने स्पष्ट किया है कि हैजा एक अत्यंत संक्रामक जलजनित रोग है, जिसमें त्वरित हस्तक्षेप, जन-जागरूकता और समन्वित चिकित्सा व्यवस्था अत्यंत आवश्यक होती है। डॉ. द्विवेदी ने यह भी बताया कि होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति में हैजा व तीव्र दस्त-उल्टी जैसी स्थितियों के लिए प्रभावी, सुरक्षित और सहायक औषधियां उपलब्ध हैं, जिन्हें आधुनिक चिकित्सा और सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों के पूरक के रूप में उपयोग किया जा सकता है।

उन्होंने अपने पत्र में कैम्पफोरा, वेराट्रम एल्बम, आर्सेनिकम एल्बम, इपेकाकुआन्हा और क्यूप्रम मेटैलिकम जैसी होम्योपैथिक औषधियों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये दवाएं लक्षणों के अनुसार व आयुष विभाग द्वारा प्रशिक्षित चिकित्सकों की निगरानी में आपात परिस्थितियों में सहायक सिद्ध हो सकती हैं।

डॉ. द्विवेदी ने प्रशासन से आग्रह किया है कि शासकीय आयुष विभाग के माध्यम से प्रभावित एवं संवेदनशील क्षेत्रों में होम्योपैथिक औषधियों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। साथ ही प्रशिक्षित चिकित्सकों की टीमें तैनात कर जन-परामर्श और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि यह पूरी प्रक्रिया नगर निगम, स्वास्थ्य विभाग और आधुनिक चिकित्सा तंत्र के समन्वय से संचालित की जानी चाहिए, ताकि आम नागरिकों को शीघ्र और प्रभावी राहत मिल सके।

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आवश्यक निर्देश जारी करने की अपील की

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डॉ. ए. के. द्विवेदी ने कहा कि यदि समय रहते प्रशासनिक, चिकित्सकीय, आयुष और जनस्वास्थ्य स्तर पर समन्वित प्रयास किए जाएं, तो हैजा जैसे संभावित प्रकोप को रोका जा सकता है और जनहानि से प्रभावी रूप से बचाव संभव है। उन्होंने जनहित में शीघ्र निर्णय लेने और आवश्यक निर्देश जारी करने की अपील की है।
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