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इंदौर: इंदौर-देवास बायपास पर NHAI की खिंचाई, हाईकोर्ट ने पूछा- जनता से टोल लेते हो तो सड़कें बदहाल क्यों?

Sat, 07 Nov 2026 08:08 AM IST
अर्जुन रिछारिया न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

इंदौर-देवास बायपास की जर्जर स्थिति पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने सख्त रुख अपनाते हुए NHAI के प्रोजेक्ट डायरेक्टर को 22 दिसंबर 2026 को व्यक्तिगत पेशी का आदेश दिया है। कोर्ट ने बदहाल सड़क की शिकायतें दूर करने और टोल वसूली पर जवाब मांगा है।
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इंदौर देवास बायपास और विजय नगर क्षेत्र गड्ढों से भरा हुआ है। - फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
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विस्तार
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इंदौर-देवास बायपास की जर्जर हालत और रखरखाव में बरती जा रही लापरवाही पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने कड़ा रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर और न्यायमूर्ति जय कुमार पिल्लई की खंडपीठ में 28 अक्टूबर 2026 को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के प्रोजेक्ट डायरेक्टर, पीआईयू इंदौर को स्पष्ट निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा है कि याचिकाकर्ता की शिकायतों और आपत्तियों का तत्काल निराकरण किया जाए और अगली सुनवाई तक की गई कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। इसके साथ ही प्रोजेक्ट डायरेक्टर को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होकर बायपास के बेहतर रखरखाव के लिए अपनी भविष्य की ठोस कार्ययोजना बताने का आदेश दिया गया है।
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बायपास की जर्जर स्थिति और सुरक्षा मानक
यह याचिका MAATR फाउंडेशन द्वारा प्रस्तुत की गई थी, जिसमें इंदौर-देवास बायपास के विभिन्न हिस्सों पर पड़े खतरनाक गड्ढों, असमतल सड़कों और फिसलन की समस्या को रेखांकित किया गया है। याचिका के माध्यम से कोर्ट को अवगत कराया गया कि बायपास पर लगातार जलभराव की स्थिति बनी रहती है, नालियां जाम हैं, और दृश्यता बेहद खराब है। इसके अलावा पुलों तथा पुलियाओं में दरारें आ चुकी हैं, और सर्विस रोड व अंडरपास की स्थिति अत्यंत दयनीय हो चुकी है। इन सभी कारणों से प्रतिदिन इस मार्ग से गुजरने वाले वाहन चालकों को भारी परेशानियों और हादसों के खतरे का सामना करना पड़ रहा है। याचिका में सुप्रीम कोर्ट द्वारा सड़क सुरक्षा और रखरखाव को लेकर जारी दिशा-निर्देशों के उल्लंघन का भी उल्लेख किया गया और प्रमाण के तौर पर सड़क की हालिया रंगीन तस्वीरें प्रस्तुत की गईं।

टोल वसूली रोकने की मांग और कोर्ट की टिप्पणी
सड़क की खराब स्थिति को देखते हुए याचिकाकर्ता की ओर से मांग की गई कि जब तक बायपास का उचित और मानकीकृत रखरखाव सुनिश्चित नहीं होता, तब तक इस मार्ग पर टोल वसूली तुरंत प्रभाव से रोक दी जाए। सुनवाई के दौरान जब NHAI के प्रतिनिधि द्वारा याचिकाकर्ता के लोकहित याचिका दाखिल करने के अधिकार पर सवाल उठाया गया, तो खंडपीठ ने इस रवैये पर भारी नाराजगी जाहिर की। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जनहित से जुड़े सड़क सुरक्षा के गंभीर मुद्दों का समाधान खोजने के बजाय याचिकाकर्ता की पात्रता पर सवाल उठाना अनुचित है। कोर्ट ने NHAI को शिकायतों के त्वरित समाधान के निर्देश दिए और मामले की अगली सुनवाई की तारीख 22 दिसंबर 2026 तय की है।
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