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Indore: इंदौर में अध्यक्षों की नियुक्ति में समझौता पाॅलिटिक्स, फिर भी मंत्री विजयवर्गीय का पलड़ा रहा भारी

सार

इंदौर में अध्यक्षों को लेकर तगड़े दावेदार थे, लेकिन हल समझौते की राजनीति से निकला। विजयवर्गीय ने जिन नामों का दामदारी से समर्थन किया था, वे  अध्यक्ष नहीं बन पाए, लेकिन ‘समझौता वार्ता’ में उन नामों पर मुहर लगी, जिन पर उन्हें कोई आपत्ति भी नहीं थी। 
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इंदौर में हो गई अध्यक्षों की नियुक्ति - फोटो : अमर उजाला
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इंदौर में भाजपा के जिला व शहर अध्यक्ष पद की नियुक्ति में प्रदेश संगठन को सबसे ज्यादा वक्त लगा। प्रदेश में 60 अध्यक्ष नियुक्त हो चुके थे। बस इंदौर ही बचा था इंदौर के अंतिम दो नामों के घोषित होने के साथ प्रदेश के जिलों में अध्यक्षों की नियुक्ती की प्रक्रिया पूरी हुई।

समझौते की राजनीति से निकाला हल 

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इंदौर में अध्यक्षों को लेकर तगड़े दावेदार थे, लेकिन हल समझौते की राजनीति से निकला। विजयवर्गीय ने जिन नामों का दामदारी से समर्थन किया था, वे तो अध्यक्ष नहीं बन पाए, लेकिन ‘समझौता वार्ता’ में उन नामों पर मुहर लगी, जिन पर विजवयर्गीय को कोई आपत्ति भी नहीं थी। इस लिहाज से मंत्री विजयवर्गीय का खेमा इंदौर की नियुक्तियों में भारी रहा। सुमित मिश्रा और श्रवण सिंह चावड़ा की गिनती भी उनके खेमे में होती है। देपालपुर विधानसभा सीट से चावड़ा की पैरवी विजवयर्गीय ने की थी।

 

इंदौर नगर निगम के लिए फैसला सुमित मिश्रा और दीपक जैन टीनू के बीच होना था। वैसे वीडी शर्मा की पसंद मुकेश राजवात भी थे। मिश्रा और जैन विजयवर्गीय से जुड़े है। विजयवर्गीय ने अपने विधानसभा क्षेत्र के होने के नाते जैन को ज्यादा दमदारी से आगे बढ़ाया था, लेकिन मिश्रा की नियुक्ति भी उनके खाते में ही मानी जाएगी,क्योकि मिश्रा को विधायक मेंदोला का समर्थन था। विधायक मेंदोला और विजयवर्गीय के बीच की राजनीतिक  राजनीतिक केमेस्ट्री जगजाहिर है।

 

संगठन को शहर से ज्यादा ग्रामीण में किसी एक नाम को चुनने में ज्यादा समय लगा। यहां चिंटू वर्मा की पैरवी विजयवर्गीय ने इसलिए की थी,क्योकि वे राजेश सोनकर के विधायक बनने के बाद जिला अध्यक्ष बने थे और उनका कार्यकाल भी पूरा नहीं हो पाया था। मंत्री तुलसी सिलावट ने अंतर दयाल का नाम जिलाध्यक्ष के लिए पूरी दमदारी से आगे बढ़ाया था।
 

रायशुमारी में नहीं था चावड़ा का नाम

दयाल को विधायक उषा ठाकुर, मनोज पटेल का समर्थन था और विशाल पटेल की भी इस नाम पर सहमति थी। चिंटू भले ही जिलाध्यक्ष के लिए रिपीट नहीं हो पाए, लेकिन श्रवण चावड़ा की विजयवर्गीय से नजदीकी रही है। चावड़ा और निर्वतमान अध्यक्ष चिंटू वर्मा के बीच भी अच्छा तालमेल है। चावड़ा का नाम तो रायशुमारी में भी प्रमुखता से नहीं था, लेकिन समझौते में विजयवर्गीय ने चावड़ा के नाम पर उंगली रखी।

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