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Indore: हुकमचंद मिल के श्रमिकों को बांटने के लिए परिसमापक के खाते में 464 करोड़ सीएम ने किए ट्रांसफर

Tue, 19 Dec 2023 05:56 PM IST
अभिषेक चेंडके न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

मिल में पांच हजार से ज्यादा श्रमिक कार्यरत है। दो से लेकर तीन लाख रुपये तक की राशि ब्याज सहित मजदूरों को दी जाएगी। मजदूरों के भुगतान के बाद मिल पर जिन संस्थानों का बकाया था, उन्हें भी राशि सौंप दी जाएगी।

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हुकमचंद मिल की फाइल पर हस्ताक्षर करते मुख्यमंत्री। - फोटो : amar ujala digital
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विस्तार
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33 सालों से बंद हुकमचंद मिल के श्रमिकों को बकाया भुगतान करने में नई सरकार भी तत्परता दिखा रही है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मंगलवार को कैबिनेट में मंजूर प्रस्ताव की फाइल पर हस्ताक्षर कर दिए। अब मजदूरों के खाते में जल्दी ही पैसा जमा होगा। मंगलवार शाम 464 करोड़ रुपये की राशि मिल परिसमापक के खाते में अंतरित कर दी गई।

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यह राशि पात्रता के अनुसार मजदूरों व उनके परिवारों को राशि वितरित की जाएगी। मिल में पांच हजार से ज्यादा श्रमिक कार्यरत थे। दो से लेकर तीन लाख रुपये तक की राशि ब्याज सहित मजदूरों को दी जाएगी। मजदूरों के भुगतान के बाद मिल पर जिन संस्थानों का बकाया था, उन्हें भी राशि सौंप दी जाएगी। जमीन पर कब्जा लेने के बाद मध्य प्रदेश हाऊसिंग बोर्ड अपना प्रोजेक्ट मिल की जमीन पर शुरू करेगा।

मजदूरों में खुशी की लहर
श्रमिक नेता नरेंद्र श्रीवंश ने बताया कि मिल बंद होने के बाद मजदूरों और उनके परिजनों का जीवन काफी परेशानी भरा गुजरा था। जब मिल बंद हुआ तब श्रमिकों के बच्चे छोटे थे। आर्थिक हालात खराब होने के कारण बच्चों को अच्छे स्कूलों में पढ़ा नहीं पाए। एक साथ पांच हजार मजदूर शहर में अचानक बेरोजगार हो गए। किसी ने चौकीदारी का काम किया तो किसी ने सब्जी बेची।
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इतने सालों बाद अब उन्हें उनके हक का पैसा मिलेगा। इससे मजदूरों व उनके परिवारों में खुशी की लहर है। श्रीवंश ने बताया कि अब मजदूरों के बकाया और बैंंक खातों की जानकारी हम परिसमापक के पास भेजेंगे, ताकि मजदूरों के निजी खातों में पैसा जमा किया जा सके। उल्लेखनीय है कि पांच साल पहले पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मिल की जमीन निगम को सौंपते हुए मजदूरों को पचास करोड़ रुपये देने की मंजूरी दी थी। तब मजदूरों के खातों में 60 हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक आ गए थे।

नीलामी में नहीं बिक पाई जमीन
1991 में जब मिल बंद हुई तब प्रदेश में पटवा सरकार थी। मुख्यमंत्री सुंदर लाल पटवा ने फिर मिल शुरू करने का आश्वासन दिया, लेकिन वादा अधूरा रहा। 33 सालों में भाजपा कांग्रेस की छह सरकारें आई और गई,लेकिन मिल चालू नहीं हो पाया। पहले मिल के टेंडर जारी कर उसे नीलाम करने की प्रक्रिया अपनाई गई, लेकिन किसी ने जमीन लेने में रुचि नहीं दिखाई। तब मिल की कीमत 300 करोड़ रुपये आंकी गई थी।

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