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भागीरथपुरा दूषित पेयजल कांड: अब भी नर्मदा का पानी पीने से बच रहे लोग, चारों तरफ गड्ढे और खुदाई

Tue, 03 Mar 2026 08:42 AM IST
Abhishek Chendke न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित जल कांड  को दो महीने बीत जाने के बाद भी हालात सामान्य नहीं हो सके हैं। पेयजल को लेकर फैला डर आज भी इतना गहरा है कि आर्थिक तंगी के बावजूद लोग बाजार से पानी खरीदने को मजबूर हैं।
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भागीरथपुरा बस्ती - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भागीरथपुरा दूषित पेयजल कांड को दो महीने पूरे हो चुके हैं, लेकिन अभी भी लोगों में पीने के पानी को लेकर डर बना हुआ है। कई परिवार आर्थिक रूप से सक्षम नहीं हैं, इसके बावजूद उन्होंने घर में पानी पीने के लिए आरओ लगवा लिया है या फिर हर दिन 25 रुपये का पानी का जार खरीद रहे हैं। अब कई इलाकों में नर्मदा जल भी साफ आने लगा है लेकिन दुकानों पर ग्राहकी में अभी भी सुधार नहीं है। खान-पान की दुकानों के व्यापारियों का कहना है कि बस्ती के लोग तो आ रहे हैं, लेकिन दूसरी बस्तियों के ग्राहक अभी तक नहीं लौटे हैं।

सड़कें खुदीं, हर तरफ गड्ढे

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भागीरथपुरा बस्ती के मुख्य मार्ग पर नई पाइप लाइन बिछाई गई है, जिसके कारण सड़क के दोनों हिस्सों की खुदाई की गई है। अब पूरी सड़क ऊबड़-खाबड़ हो चुकी है। इसके अलावा गलियों में भी नई लाइन डालने के कारण सीमेंट की सड़कें खोदी गई हैं और वहां भी यही हाल है। रहवासियों का कहना है कि पानी की व्यवस्था के लिए सड़कें खोदी गई थीं। यदि वर्षाकाल के पहले इन्हें ठीक नहीं किया गया तो वाहनों के दबाव से चैंबर फिर से टूट जाएंगे।

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इधर खाने-पीने की दुकानों पर ग्राहक पानी पीने से कतरा रहे हैं। बस्ती में चाय और कचोरी-पोहे की कई दुकानें हैं। दुकानदारों का कहना है कि ग्राहक आते तो हैं, लेकिन पानी के बारे में जरूर पूछते हैं। वे दुकान का पानी नहीं पीते और बोतलबंद पानी खरीदना पसंद करते हैं। रहवासी रमेश मंडावरा का कहना है कि लोगों का नल के पानी से विश्वास पूरी तरह उठ चुका है।

केवल बाहरी लोग ही नहीं, बस्ती के कई निवासी भी नल का पानी सीधे नहीं पीते हैं। इस वजह से बस्ती के मकान भी कई दिनों तक खाली पड़े रहते हैं। लोग भागीरथपुरा में कमरे किराए पर लेने से परहेज कर रहे हैं, जबकि पहले पास में इंडस्ट्रियल एरिया होने के कारण कमरे आसानी से किराए पर उठ जाते थे और किराया भी अच्छा मिलता था। गौरतलब है कि भागीरथपुरा बस्ती में दूषित पानी पीने के कारण 36 लोगों की जान जा चुकी है और डेढ़ हजार से ज्यादा लोग बीमार हुए थे, जिनमें से कई लोगों को निजी अस्पतालों में इलाज कराना पड़ा था।

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