इंदौर के पटेल नगर स्थित बेलेश्वर मंदिर में हादसे से ठीक पांच मिनट पहले का वीडियो आया है। वीडियो बावड़ी धंसने से पहले का है जिसमें हवन होता दिखाई दे रहा है। यह पूर्णााहुति के ठीक पहले का दृश्य है। हवन में बैठे एक श्रद्धालु ने ही इस वीडियो को बनाया था जो सोमवार को इंदौर में सोशल मीडिया पर आया। इसमें वह लोग भी दिख रहे हैं जिन्होंने इस हादसे में जान गंवा दी। गौरतलब है कि जूनी इंदौर के स्नेह नगर के इस मंदिर में 30 मार्च रामनवमी के दिन बावड़ी धंसने से 36 श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी।
बावड़ी को भी तोड़ा
सोमवार को हुई कार्रवाई में बावड़ी को तोड़ दिया गया है। बावड़ी को मलबे से भरकर उसका नामो-निशान मिटा दिया है। बावड़ी के ऊपर बने अवैध मंदिर को भी तोड़ दिया गया है। इसके अलावा नए मंदिर के ढांचे को भी जेसीबी और पोकलेन की मदद से तोड़ा गया। यह अलसुबह किया गया ताकि किसी तरह का विरोध न हो। मंदिर तोड़ने का बजरंग दल कार्यकर्ता विरोध करने पहुंचे, लेकिन नगर निगम की कार्रवाई प्रभावित नहीं हुई। अफसरों का कहना है कि बावड़ी में दरारें होने से उसका सरंक्षण संभव नहीं है। इस वजह से उसे भरने का ही फैसला लिया गया।
रहवासी बोले सही निर्णय
पटेल नगर क्षेत्र के रहवासी बोले कि अवैध निर्माण हटाने के बाद बावड़ी को बंद करने का फैसला ठीक रहा। जब भी हम घरों से बाहर निकलते थे तो बावड़ी हादसे की याद दिलाती थी। हमें हमारे परिजन के बिछड़ने का दुख होता था। वहीं सिंधी समाज ने इसका विरोध किया है। यहां सुबह मंदिर में सेवा देने वाला परिवार भी पुलिस से भिड़ गया। एक सिंधी परिवार से एक व्यक्ति ने वीडियो जारी कर मंदिर तोड़ने की घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उनका कहना था कि इस हादसे में उनकी बेटी भी मर गई लेकिन इस तरह से आस्था के प्रतीक को तोड़ा जाना गलत है।
कांग्रेस पहुंची हाईकोर्ट
शासन द्वारा मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए गए हैं तथा ट्रस्ट के पदाधिकारियों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किया गया है। वहीं दूसरी और कांग्रेस ने इंदौर शहर के कुएं / बावड़ियों सहित कुल 609 जलाशयों पर से अवैध निर्माण हटाने, घटना की मजिस्ट्रियल जांच के स्थान पर उच्च न्यायलय के सिटिंग जज से जुडिशियल जांच कराने तथा दोषियों पर कारवाई की मांग को लेकर आज उच्च न्यायलय में जनहित याचिका दायर की है। इस पर संभवतः आगामी दो से तीन दिनों में सुनवाई हो सकती है।