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इंदौर: बिना वेरिफिकेशन के दौड़ रही 25 हजार बाइक टैक्सी, ऑटो चालकों ने की बंद करने की मांग

Thu, 01 Oct 2026 08:23 PM IST
Arjun Richhariya न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

टैक्सी चालकों ने अवैध रूप से चल रही बाइक टैक्सियों के विरोध में पुलिस कमिश्नर को ज्ञापन सौंपा। चालकों ने बिना एग्रीगेटर लाइसेंस और पुलिस सत्यापन के संचालित दोपहिया वाहनों पर कार्रवाई न होने पर भूख हड़ताल की चेतावनी दी है।
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सड़कों पर उतरने को मजबूर हुए ऑटो चालक - फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
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विस्तार
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इंदौर के सीएनजी ऑटो रिक्शा, बैटरी ऑटो रिक्शा और कार टैक्सी चालकों ने शहर में अवैध रूप से संचालित बाइक टैक्सी सेवाओं के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ऑटो एवं टैक्सी चालक संघ के पदाधिकारियों ने पुलिस कमिश्नर को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर निजी वाहनों का व्यावसायिक उपयोग करने तथा बिना ट्रेड लाइसेंस (एग्रीगेटर) के चल रही बाइक टैक्सी सेवाओं के विरुद्ध संयुक्त अभियान चलाकर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। चालकों का कहना है कि शहर में लगभग 27 हजार ऑटो रिक्शा चालक सार्वजनिक परिवहन सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन अवैध बाइक टैक्सियों के कारण उनकी रोजी-रोटी पर संकट आ गया है।
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ऑटो चालकों की आर्थिक स्थिति बिगड़ रही
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे राजेश बिडकर और निलेश सूर्यवंशी ने कहा कि ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि प्रतिदिन 500 से 700 रुपये कमाने वाले ऑटो चालकों को परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है। इसके साथ ही परिवहन विभाग से परमिट प्राप्त करने, बीमा कराने, फिटनेस और मीटर सत्यापन के दौरान ऑटो चालकों को भारी रिश्वत देने के लिए मजबूर होना पड़ता है। तेज गति से बढ़ती अवैध बाइक टैक्सियों ने इस संकट को और गहरा कर दिया है, जिससे वैधानिक रूप से परमिट लेकर वाहन चलाने वालों का धंधा पूरी तरह चौपट हो चुका है।

बिना पुलिस सत्यापन और ट्रेड लाइसेंस के संचालन हो रहा
चालकों का आरोप है कि लगभग 7 वर्ष पूर्व शुरू हुई बाइक टैक्सी सेवाओं के पास इंदौर परिवहन विभाग से कोई एग्रीगेटर लाइसेंस नहीं है। वर्तमान में शहर में 25 हजार राइडर सक्रिय हैं, जिनमें अन्य शहरों और प्रदेशों के दोपहिया वाहन भी शामिल हैं। इन चालकों का न तो पुलिस सत्यापन हुआ है और न ही प्रशासन के पास इनकी कोई पहचान या वर्दी का रिकॉर्ड है। पूर्व में भी राइडर द्वारा आपराधिक घटनाओं और दुर्घटनाओं को अंजाम दिया जा चुका है, जिससे शहर की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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प्रशासनिक निष्क्रियता का मुद्दा भी उठा
ऑटो चालकों ने ज्ञापन में बताया कि वर्ष 2019 से वे लगातार इसका विरोध कर रहे हैं। जिला न्यायालय और उच्च न्यायालय द्वारा पूर्व में बाइक टैक्सी सेवाओं पर प्रतिबंध लगाने और सख्त आदेश पारित करने के बावजूद स्थानीय प्रशासन और आरटीओ द्वारा केवल खानापूर्ति की गई। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का मुख्यालय बाहर होने के कारण स्थानीय साइबर सेल, यातायात पुलिस और परिवहन विभाग प्रभावी कार्रवाई करने में बेबस नजर आ रहे हैं। इससे शासन को राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है, जबकि शहर में इनके अवैध होर्डिंग्स भी लगे हुए हैं।

पांच दिन की समय सीमा
ऑटो एवं बैटरी ऑटो चालकों ने पुलिस और आरटीओ से संयुक्त टीम बनाकर चेकिंग अभियान चलाने, मेट्रो स्टेशनों के दोनों तरफ ऑटो स्टैंड बनाने, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के लाइसेंस की जांच कर प्रकरण दर्ज करने और शासकीय दरों के अनुसार किराया तय करने की मांग की है। इसके अलावा नशे में वाहन चलाने वालों पर ऑन-स्पॉट कार्रवाई, राजवाड़ा पर दुर्घटनाग्रस्त चालक के परिवार को 20 लाख रुपये मुआवजा देने तथा पुलिस द्वारा ऑटो चालकों का सहयोग करने की मांग रखी गई है। चालकों ने चेतावनी दी है कि यदि पांच दिनों में मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे काम बंद हड़ताल और भूख हड़ताल पर चले जाएंगे।
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