यशवंतराव के तौर तरीकों से खुश नहीं थे पटेल
देशी रियासतों के भारत में विलीनीकरण को लेकर इंदौर राज्य में जो घटित हो रहा था उससे और मध्य भारत संघ के गठन को लेकर महाराजा यशवंत राव होल्कर के तौर-तरीकों से सरदार पटेल खुश नहीं थे। इस कारण 9 जनवरी 1948 को होल्कर राज्य के प्रधानमंत्री एम. बी. भिड़े को केंद्र सरकार के तत्कालीन सचिव वी.पी. मेनन ने एक पत्र लिखा था। उसमें मेनन ने उल्लेख किया था कि सरदार पटेल दिसंबर 1947 के पत्र का होल्कर सरकार द्वारा जवाब नहीं देने को उचित नहीं मानते हैं और आपको (यशवंत राव होल्कर को) यह साफ कर देना चाहते हैं कि सरदार पटेल महाराजा होल्कर के साथ कोई भी बातचीत नहीं करेंगे। बता दें, देशी रियासतों के विलय में सरदार पटेल के साथ ही वी. पी. मेनन की भी अहम भूमिका रही थी।
सिरेमल बापना ने सरदार पटेल को लिखा पत्र
सरदार पटेल की यशवंतराव होल्कर से नाराजगी सामने आने के बाद इंदौर राज्य के तत्कालीन प्रधानमंत्री सिरेमल बापना, जो कि स्वास्थ ठीक नहीं होने की वजह से राजस्थान के उदयपुर में परिवार के साथ रह रहे थे, ने 10 जनवरी 1948 को सरदार पटेल को निजी पत्र लिखा था। बापना ने पत्र में उल्लेख किया था कि इंदौर राज्य में मैंने 32 वर्ष कार्य किया है। इंदौर को लेकर में चिंतित हूं, इंदौर के महाराजा राजनीतिक दृष्टि से रोष के शिकार हैं। कुछ सरकारी कार्यों की वजह से राज्य की प्रजा और उनमें गलतफहमी निर्मित हो गई है। हम स्थिति को सामान्य करने के उत्सुक हैं। बापना साहब के पत्र के जवाब में वी.पी.मेनन ने उल्लेख किया कि इंदौर के महाराजा से बीकानेर में हुए समझौते में वे सहमत थे, परंतु इंदौर पहुंच कर उन्होंने अपना विचार ही बदल दिया।
यह थी यशवंत राव होल्कर और पटेल के बीच विवाद की वजह
ऐतिहासिक दस्तावेजों की पड़ताल से पता चलता है कि इंदौर रियासत के मंत्रिमंडल में नियुक्ति को लेकर महाराजा यशवंत राव होल्कर और सरदार पटेल में विवाद पैदा हो गया था। प्रधानमंत्री पद पर एम.बी.भिड़े की नियुक्ति से पटेल सहमत थे, लेकिन मंत्रिमंडल में एन.सी. मेहता की सेवाएं समझौते के अनुसार समाप्त होनी थीं, जो नहीं हुई थीं। विलय के बाद होल्कर राज्य से ढंढा, निडु, जनरल विलियम्स, मसूद अली खान और दो अमेरिकी अधिकारियों को पद से हटाना था, पर उन्हें नहीं हटाया गया था। मेहता को पद से नहीं हटाने को सरदार पटेल अपने आदेश का हनन मान रहे थे। सरदार पटेल का यह सोचना था कि विलय के बाद हुए समझौते के अनुसार परिवर्तन नहीं करना एक गंभीर त्रुटि है, इसीलिए वे यशवंत राव से नाराज हो गए थे। कुछ ऐतिहासिक पत्रों से पटेल की नाराजगी जाहिर होती है। हालांकि, बाद में इंदौर राज्य भी भारतीय संघ में शामिल हो गया था और उक्त विवाद सरलता से हल हो गया था।