कृष्णागुरुजी ने होलिका दहन का महत्व बताया।
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त्रिवेणी शनि नवग्रह मंदिर में इस वर्ष भी होलिका दहन का आयोजन भव्य रूप से किया गया, जिसमें ग्रह पीड़ा और विकार मुक्ति के संकल्प के साथ श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। इस धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन कृष्णा गुरुजी सोशल वेलफेयर सोसाइटी के तत्वावधान में किया गया।
भद्रा काल का साया, सूर्यपुत्री भद्रा की विशेष भूमिका
कृष्णा गुरुजी ने बताया कि इस वर्ष होलिका दहन भद्रा काल के प्रभाव में हुआ। उन्होंने समझाया कि भद्रा, सूर्यदेव की पुत्री और शनि ग्रह की बहन मानी जाती हैं। ऐसे में इस बार के होलिका दहन में सूर्य, शनि और भद्रा—तीनों साक्षी रहे।
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होलिका दहन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कृष्णा गुरुजी ने कहा कि यह पर्व दुष्टता, लोभ और विकारों के अंत का प्रतीक है। होलिका दहन का संदेश यही है कि अच्छी नीयत वाले व्यक्ति के सामने कोई भी दिव्य शक्ति टिक नहीं सकती, ठीक वैसे ही जैसे भक्त प्रह्लाद की भक्ति के आगे होलिका पराजित हुई। उन्होंने श्रद्धालुओं से होली को आपसी मनमुटाव, द्वेष और रंजिश को भुलाकर प्रेम और सौहार्द के साथ मनाने की अपील की।
शनि मंदिर प्रशासन व भक्तों की सहभागिता
इस पावन अवसर पर शनि मंदिर प्रशासन के शैलेंद्र त्रिवेदी, अर्जुन परमार सहित अन्य श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। भक्तों ने होलिका में अपने विकारों और नकारात्मक विचारों को अर्पित करने का संकल्प लिया और विश्व शांति की कामना की।
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समाज कल्याण के संकल्प के साथ हुआ आयोजन
यह कार्यक्रम कृष्णा गुरुजी सोशल वेलफेयर सोसाइटी के तत्वावधान में आयोजित किया गया, जिसमें समाज कल्याण और आध्यात्मिक उन्नति के उद्देश्य को प्राथमिकता दी गई।