इंदौर पुलिस ने हर्बल प्रोडक्ट की फ्रेंचाइजी देने के नाम पर कई लोगों से ठगी करने वाले गिरोह को पकड़ा है। राजस्थान जिले के एक फरियादी ने यह शिकायत दर्ज कराई थी कि इंदौर स्थित एक कंपनी ने हर्बल प्रोडक्ट की फ्रेंचाइजी के नाम पर उनके साथ लाखों रुपए की ठगी की है। एक कॉल सेंटर से उसे इस विषय में फोन आया और बाद में उसके साथ ठगी की गई। डीसीपी निमिष अग्रवाल ने बताया कि पुलिस ने जब इंदौर के फ्लैट पर छापामार कार्रवाई की तो वहां पर कई युवतियां हर्बल प्रोडक्ट की कॉलिंग करते हुए दिखाई दी। यहां पर मुख्य सरगना गणेश को क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार कर लिया। गणेश ने क्राइम ब्रांच को बताया कि उसने स्वास्तिक हर्बल, श्री आरोग्य संस्था व सहयोग आरोग्य संस्था के नाम से अलग-अलग फर्जी कंपनियां बनाई जो सिर्फ कागजों में थी उसका कोई अस्तित्व नहीं था।
गणेश ने बताया कि इंदौर में रहकर देश के अलग-अलग राज्यों में उसकी ठीम ठगी करती थी। पैसे लेने के बाद अपनी कंपनी का नाम बदलकर अन्य कंपनी खोल ली जाती थी। इंदौर क्राइम ब्रांच को इस मामले में भागलपुर व राजस्थान से शिकायत मिली थी। इसके बाद जब आरोपी के बारे में क्राइम ब्रांच ने जानकारी जुटाई तो इंदौर के कॉल सेंटर पर छापा मारा।
धोखाधड़ी के लिए फोन करने वाली युवतियों की टीम मिली
जब पुलिस की टीम यहां पर पहुंची तो कई लड़कियां देश के अन्य जिलों में फोन कर इस हर्बल प्रोडक्ट के फ्रेंचाइजी के नाम पर धोखाधड़ी कर रहीं थी। इसके लिए गणेश उन्हें बाकायदा प्रशिक्षण देता था। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि लड़कियों को इस धोखाधड़ी के विषय में जानकारी थी या नहीं।
जरूरतमंदों के बैंक खाते पांच हजार रुपए में खरीदे
जब भी पुलिस को आरोपी के खिलाफ शिकायत मिलती वह अपना ऑफिस का एड्रेस भी बदल देता था। गणेश इतना शातिर था कि वह जिस कंपनी के नाम से लोगों से ठगी करता था, कुछ दिनों में उस कंपनी का नाम वह वेबसाइट से हटा देता और धोखाधड़ी करने के बाद अन्य फर्जी कंपनियां खोलने लगता। वह अपनी फर्जी कंपनियां खोलने के लिए ऐसे व्यक्तियों की तलाश करता था जो बेरोजगार हो और उनके नाम से एक बैंक खाता और उन्हीं के नाम से कुछ सिम मंगवाता था। जिस व्यक्ति का बैंक खाता होता था उसे वह हर महीने 5 हजार रुपए प्रति खाता देता था और जब कंपनी बंद हो जाती थी तो संबंधित व्यक्ति को रुपए नहीं देता था। बेरोजगार व्यक्ति अपने नाम से सिम लौटाकर गणेश को दे दिया करते थे और अपना बैंक खाता भी गणेश को दे देते थे। जब गणेश अपनी ठगी का रुपया इन बैंक हाथों में मंगवा लेता था और पकड़े जाने के डर से कुछ समय बाद उसे बंद कर देता था।