छठ पर्व में क्या-क्या होगा?
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इंदौर के कई क्षेत्रों में जहां पूर्वांचलवासी निवास करते हैं, वहां छठ पर्व की तैयारियां पूरी हो गई हैं और कुंड को साफ कर तैयार किया गया है। कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी यानी 25 अक्तूबर को नहाय और खाय से यह पर्व आरंभ होगा। छठ को अस्त होते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा और अगले दिन सुबह यानी 28 अक्तूबर को उगते सूर्य को अर्घ्य देकर महापर्व का समापन होगा। नगर में जिन स्थानों पर छठ पर्व आयोजित होता है, वहां पूर्वांचल की संस्कृति की खास झलक देखने को मिलती है। एक अनुमान के अनुसार नगर में करीब 1990 से यह पर्व मनाया जाता है, इस तरह करीब 36 वर्ष से नगर में छठ पर्व का आयोजन हो रहा है।
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जल का महत्व बताने वाला पर्व
भारतीय संस्कृति में पर्वों और त्योहारों में पर्यावरण, जल और जीव संरक्षण और उनके प्रति श्रद्धा के भाव की सीख देते हैं। गोवर्धन पूजा पर पशुओं की पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि कार्तिक माह में भगवान श्री हरि जल में निवास करते हैं और सूर्य को जल का अर्घ्य देकर सूर्य का पूजन करते हैं। छठ पर्व वास्तव में जल के महत्व को दर्शाता है।
छठ पर्व देता है पर्यावरण संरक्षण का संदेश
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यहां मनेगा छठ पर्व
इंदौर में बाणगंगा, विजय नगर, एरोड्रम रोड, कैट रोड और अन्य क्षेत्रों में छठ पर्व के कुंड तैयार हो गए हैं। पूर्वोत्तर सांस्कृतिक संस्थान इंदौर के जगदीश सिंह ठाकुर का कहना है कि पूर्वोत्तर वासी छठ पर नगर में ही अपने-अपने क्षेत्रों में यह पर्व मनाते हैं। इंदौर नगर और औद्योगिक क्षेत्र पीथमपुर को सम्मिलित कर करीब सात से आठ लाख बिहार, यूपी और झारखंड के निवासी मालवा के इस नगर और आसपास में रहते हैं। नगर में करीब 100 से 150 से अधिक स्थानों पर छठ पूजा का आयोजन आयोजित होता है। इंदौर के आसपास पीथमपुर, देवास, इंदौर, महू और अन्य ग्रामीण क्षेत्रों को मिलकर करीब आठ लाख पूर्वांचल वासी निवास करते हैं।
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